गुस्सा और दुख पर मजबूरी भारी एक तरह कुआं, तो दूसरी ओर खाई पर मजबूरी है मतदाननुक्कड़ चर्चाफोटो-23संवाददाता, गोपालगंजचुनाव का पारा चढ़ने के साथ ही चुनावी रणनीति चौक-चौराहों और चाय की दुकानों पर हो रही है. मंगलवार की शाम 4 बजे शहर के बंजारी रोड स्थित सुनील की चाय दुकान पर सरकार बनाने और बिगाड़ने का दौर शुरू था. यहां युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की अच्छी-खासी भीड़ इस चर्चा को सुनने के लिए देखी गयी. वीरेंद्र यादव अधिवक्ता कहते हैं कि इस बार कुछ भी नहीं कहा जा सकता है. आमने-सामने की लड़ाई नजर आ रही है. भाजपा और सहयोगी दल तथा दूसरे पक्ष से महागंठबंधन के उम्मीदवार के बीच चुनाव की चर्चा फंसी हुई थी. असलम मिस्त्री का दावा था कि बिहार में इस बार खिचड़ी सरकार बनेगी, जबकि रामेश्वर चौधरी स्पष्ट बहुमत की बात कर रहे थे. युवा मतदाता हजियापुर के रहनेवाले चंदन ने एनडीए की सरकार बनाने में लग गये, जबकि राजेंद्र तिवारी ने अपने तर्कों से नीतीश कुमार की सरकार बनाने का दावा कर डाला. कोई सुबास सिंह को जिताने लगा, तो रेयाजुल हक राजू को. कई लोग तो निर्दलीय ओमप्रकाश सिंह को ही जिताने लगे. इतने में किराना दुकानदार राकेश प्रसाद ने अनुप श्रीवास्तव के भाजपा के पक्ष में प्रचार की बात कह कर चर्चा को आगे बढ़ा दिया. बगल में चाय पी रहे जगीरी टोला के रामेश्वर चौधरी ने कहा कि इस बार मतदाताओं की समस्याएं हासिये पर हैं. दुख है, पर मतदान करने की मजबूरी है. एक तरफ कुआ है, तो दूसरी तरफ खाई है. मतदाता सीने पर पत्थर रख कर करना मजबूरी है. राजेंद्र तिवारी ने कहा कि कल नीतीश जी की सभा के बाद स्पष्ट होगा कि गोपालगंज का जनादेश क्या है. इतने में सुबास प्रसाद उर्फ टप्पू चाय लेकर पहुंच गया. उन्होंने कहा कि मेरे ही गांव दानापुर में तीस अक्तूबर को नरेंद्र मोदी की सभा होनी है. पीएम की सभा के बाद चुनाव का स्पष्ट रूप दिखेगा. चुनाव की चर्चा आगे बढ़ती है और बिहार की सरकार बनाने पर चर्चा जाकर अटक जाती है.
गुस्सा और दुख पर मजबूरी भारी
गुस्सा और दुख पर मजबूरी भारी एक तरह कुआं, तो दूसरी ओर खाई पर मजबूरी है मतदाननुक्कड़ चर्चाफोटो-23संवाददाता, गोपालगंजचुनाव का पारा चढ़ने के साथ ही चुनावी रणनीति चौक-चौराहों और चाय की दुकानों पर हो रही है. मंगलवार की शाम 4 बजे शहर के बंजारी रोड स्थित सुनील की चाय दुकान पर सरकार बनाने और बिगाड़ने […]
