Gopalganj News : कालाजार उन्मूलन के लिए 157 ग्रामीण चिकित्सक और कार्यकर्ता प्रशिक्षित

जिले में कालाजार उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक और ठोस कदम उठाया है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुषमा शरण के निर्देश पर 26 जून से चार जुलाई तक छह प्रखंडों में की-इनफार्मेंट्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में कुल 157 ग्रामीण चिकित्सकों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया.

गोपालगंज. जिले में कालाजार उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक और ठोस कदम उठाया है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुषमा शरण के निर्देश पर 26 जून से चार जुलाई तक छह प्रखंडों में की-इनफार्मेंट्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में कुल 157 ग्रामीण चिकित्सकों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया. भोरे से 27, हथुआ से 26, सदर से 25, कुचायकोट से 26, पंचदेवरी से 28 और बरौली से 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया. उन्हें कालाजार रोग की पहचान, लक्षणों की समझ और प्राथमिक उपचार संबंधी गहन जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया. मास्टर ट्रेनर के रूप में अशुतोष राय, अभिजीत कुमार और गांधी फैलो ज्योति जाधव ने प्रशिक्षण दिया. संबंधित प्रखंडों के वेक्टर बॉर्न डिजीज सुपरवाइजर भी प्रशिक्षक की भूमिका में उपस्थित रहे. प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने में जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंसल्टेंट अमित कुमार, वीडीसीओ प्रशांत कुमार, राजेश कुमार और बिपीन कुमार की अहम भूमिका रही. अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

इनकी होगी महत्वपूर्ण भूमिका

की-इनफार्मर यानी आशा, ग्रामीण चिकित्सक, स्थानीय दवा दुकानदार, पूर्व मरीज और पंचायत प्रतिनिधि वे प्रमुख लोग हैं जो समुदाय स्तर पर कालाजार के लक्षणों की पहचान कर शुरुआती चरण में ही स्वास्थ्य विभाग को सूचना देते हैं.

लक्षण व संदिग्ध मरीजों की जानकारी देंगे की-इनफार्मेंट्स :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुषमा शरण ने बताया कि प्रशिक्षित की-इनफार्मेंट्स को कालाजार के लक्षणों जैसे बुखार का लंबे समय तक बने रहना, वजन घटना, तिल्ली और यकृत का बढ़ना आदि के अलावा पीकेडीएल की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए प्रशिक्षित किया गया. ये की-इनफार्मेंट्स अब समुदाय में संभावित रोगियों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करेंगे जिससे समय पर जांच और इलाज संभव हो सकेगा. ग्रामीण स्तर पर जनजागरूकता फैलाना भी है. प्रशिक्षित की-इनफार्मेंट्स लोगों को शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क करेंगे और उन्हें इलाज के लिए प्रेरित करेंगे.

की-इनफार्मेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण

डॉ सुषमा शरण ने कहा कि “की-इनफार्मेंट्स के माध्यम से बीमारी की जल्द पहचान संभव होगी. उनका सहयोग कालाजार नियंत्रण में मील का पत्थर साबित होगा.” वहीं जिला कंसल्टेंट अमित कुमार ने इसे सामुदायिक सहभागिता की दिशा में एक मजबूत पहल बताया. जिले में कालाजार के खिलाफ चल रही इस मुहिम में की-इनफार्मेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. प्रशिक्षण के जरिए तैयार यह टीम ग्रामीण इलाकों में न केवल मरीजों की पहचान करेगी बल्कि समुदाय में इन रोगों के प्रति चेतना भी फैलायेगी.

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