मरीजों को नहीं भा रही हैं ऑनलाइन सेवाएं

गोपालगंज : जिले के सरकारी अस्पतालों के ओपीडी में डॉक्टर से दिखाने के लिए ऑनलाइन नंबर लगाने की कवायद सुस्त पड़ गयी है. कहीं ऑनलाइन नंबर लगाने के बाद मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं है, तो कहीं ऑनलाइन नंबर के बारे में स्वास्थ्यकर्मी को जानकारी नहीं है. ऐसे में ऑनलाइन पर्ची लगाने की कवायद सुस्त […]

गोपालगंज : जिले के सरकारी अस्पतालों के ओपीडी में डॉक्टर से दिखाने के लिए ऑनलाइन नंबर लगाने की कवायद सुस्त पड़ गयी है. कहीं ऑनलाइन नंबर लगाने के बाद मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं है, तो कहीं ऑनलाइन नंबर के बारे में स्वास्थ्यकर्मी को जानकारी नहीं है.

ऐसे में ऑनलाइन पर्ची लगाने की कवायद सुस्त पड़ गयी है. स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई में सभी सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन नंबर लगाने की प्रक्रिया शुरू की है. ऑनलाइन नंबर लगाने पर किसी तरह का कोई शुल्क भी नहीं है.
इतना ही नहीं विशेषज्ञ डॉक्टर से लेकर रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी जांच की जानकारियां भी आसानी से उपलब्ध करानी हैं. ओपीडी में नंबर लगाने को लेकर हो रही मरीजों की भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन नंबर की पहल शुरू की थी, लेकिन प्रचार-प्रसार और स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी नहीं होने के कारण इस सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. आंकड़ों पर गौर तो अबतक सदर अस्पताल में एक भी मरीज का ऑनलाइन नंबर नहीं लगी है.
आते हैं हर रोज 650 मरीज
सदर अस्पताल के ओपीडी में हर रोज करीब 450 से 650 मरीज आते हैं. इन मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर को ढूंढ़ने तथा काउंटर पर कतार में खड़े होकर नंबर लगाने में ही घंटों बीत जाता है. ऑनलाइन नंबर लगाने की सुविधा शुरू हो जाने के बाद भी इन मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई.
डाउनलोड करें एप
ऑनलाइन पंजीकरण दो तरह से किया जा सकता है. मोबाइल एप से करने के लिए हिंदी या अंग्रेजी में स्वास्थ्य बिहार लिखकर ओपेन करनी होगी. इसके बाद भाषा का चयन कर फॉर्म को भरकर साइनअप करनी होगा. वहीं वेबसाइट से statehealthsocietybihar.org या www.health.bih.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है.
बोले सीएस
सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का नंबर ऑनलाइन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इलाज से लेकर विभिन्न प्रकार के रोगों की जांच के लिए नंबर ऑनलाइन लगाया जा सकता है. काउंटर से नंबर लगाने पर निर्धारित शुल्क देना होगा, ऑनलाइन नंबर लगाने पर कोई शुल्क नहीं है. इसके लिए प्रचार प्रसार किया जा रहा है, ताकि अधिक-से-अधिक लोग इसका लाभ उठा सके.
डॉ नंदकिशोर सिंह, सिविल सर्जन

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