आंसुओं को खाक में बोना ही था तुम को अपने हाल पर रोना था...

गोपालगंज : आलमी अदब पारे वो अंजुमन तरक्की उर्दू गोपालगंज की ओर से जंगलिया में सेमिनार एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. पहले सेशन में स्वतंत्रता सेनानी और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का आधुनिक शिक्षा में योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें मेराजुद्दीन तश्ना व मौलाना […]

गोपालगंज : आलमी अदब पारे वो अंजुमन तरक्की उर्दू गोपालगंज की ओर से जंगलिया में सेमिनार एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. पहले सेशन में स्वतंत्रता सेनानी और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का आधुनिक शिक्षा में योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें मेराजुद्दीन तश्ना व मौलाना जहीर अहमद नदवी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये.

दूसरे सेशन की शुरुआत मदीना मुनव्वरा सऊदी अरब से पधारे मशहूर शायर जमीर सीवानी के सम्मान के साथ शुरू हुआ. उर्दू गोपालगंज के सचिव प्रोफेसर रजी अहमद फैजी, जुल्फिकार अली, अकबर हुसैन, फहीम जोगापुरी ने सम्मिलित रूप से जमीर सीवानी को शाल ओढ़ाकर कर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया. कवि सम्मेलन की अध्यक्षता उस्ताद शायर फहीम जोगापुरी ने की तथा संचालन मेराजुद्दीन तश्ना ने किया.
पसंदीदा अशआर मुलाहिजा फरमाएं. फहीम जोगापुरी ने अपनी रचना ‘हम तो गए थे अदलो मसावात के लिए, उस दर ने चुन लिया हमें खैरात के लिए’ से जमकर तालियां बटोरीं. जमीर सीवानी ने वह बात क्यों दलील बनायी नहीं गयी, गर्दन हमारी कट गयी जिस बात के लिए’ से छा गये.
मेराजुद्दीन तश्ना ने अपनी रचना आंसुओं को खाक में बोना ही था, तुम को अपने हाल पर रोना ही था. की प्रस्तुति ने व्यवस्था पर चोट किया. रजी़ अहमद फ़ैज़ी की रचना जो आसमान पर है वो महताब और है, मैं जिस को देखता हूं तहे आब और है, से महफिल तालियों से गूंज उठा.
इस मौके पर शयर सभी बहुआरवी, परवेज अशरफ, चांद जौहरी ,मनीष कुमार मिश्रा, कमाल मीरापुरी, आजाद मांझागढ़ी, इंतखाबुर रहमान फहमी, गुलाम सरवर हाशमी, शौकत अली शौकत इनके अलावा रेयाज मोहियुद्दीन पुरी, मधुसुदन मधु, एहसानुल्लाह एहसान, प्रकाश चंद्र नीरज,व दीगर कवियों ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
इस मौके पर मुख्तार आलम इंजीनियर, सुबहान अली, इफ्तेखार हैदर, मोहियुद्दीन अहमद, नजरे हयात, जु़ल्फिकार अली भुट्टो, परवेज आलम, सलाहुद्दीन, सलाहुद्दीन अंसारी, मो कमरुद्दीन, महमूद आलम के अलावा शहर के सम्मानित एवं बुद्धिजीवियों की भारी संख्या में उपस्थिति ने कवि सम्मेलन को यादगार बना दिया.

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