कृषि शिक्षा का लक्ष्य आत्मनिर्भर व नवाचारशील बनाना है : कुलपति

कृषि शिक्षा का लक्ष्य आत्मनिर्भर व नवाचारशील बनाना है : कुलपति

सीयूएसबी में मशरूम फार्मिंग ”पढ़ाई के साथ कमाई” पर कार्यशाला का आयोजन

वरीय संवाददाता, बोधगया.

सीयूएसबी के कृषि एवं विकास अध्ययन स्कूल के अंतर्गत कृषि विभाग की ओर से जीवन विज्ञान विभाग के सहयोग से ”अर्न वाइल यू लर्न: अनलॉक प्रॉस्पेरिटी थ्रू मशरूम” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में नवनिर्मित स्वामीनाथन भवन में आयोजित कार्यशाला में करीब 100 छात्रों ने मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन के व्यावहारिक प्रशिक्षण में हिस्सा लिया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने संदेश के माध्यम से कहा कि कृषि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर और नवाचारशील बनाना है. मशरूम उत्पादन जैसे उद्यमशील प्रशिक्षण भविष्य के भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के स्तंभ बनेंगे. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय भविष्य में कृषि उद्यमिता और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों के साथ एमओयू करने जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को स्टार्टअप व स्किल डेवलपमेंट के अधिक अवसर प्राप्त होंगे. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मशरूम रिसर्च से प्रो दयाराम, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से डॉ राजेंद्र प्रसाद ने मशरूम उत्पादन के वैज्ञानिक तरीके, पैकेजिंग, मूल्य संवर्द्धन और विपणन की बारीकियां साझा कीं. उन्होंने कहा कि मशरूम अब केवल सब्जी नहीं, बल्कि पोषण और रोजगार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है. कार्यशाला में कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा ने ‘मशरूम मैन ऑफ बिहार’ के नाम से प्रसिद्ध प्रो दयाराम के कार्यों की सराहना की तथा भविष्य में इस प्रकार के और भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का आश्वासन दिया. इस आयोजन के प्रमुख प्रो एपी सिंह, अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष, कृषि विभाग ने छात्रों को नवाचार और प्रयोग की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

छात्रों में उद्यमिता व आत्मनिर्भरता की भावना को और सशक्त करेगा

सीयूएसबी के पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि सीयूएसबी में मशरूम उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण पिछले साल से कृषि विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ हेमंत कुमार सिंह द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है. इस वर्ष से छात्रों को समूह बना कर इस पहल से जोड़ा जायेगा, जिसमें वे उत्पादन तकनीक, विपणन ज्ञानवर्धन तथा मूल्य संवर्धित उत्पाद निर्माण का भी लाभ उठायेंगे. यह प्रयास छात्रों में उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की भावना को और सशक्त करेगा. इस कार्यशाला में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से कैंपस में नवाचार व कृषि उद्यमिता का वातावरण सशक्त हुआ. कार्यशाला ने छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ किया और उन्हें कृषि आधारित स्टार्टअप व रोजगार सृजन की दिशा में प्रेरित किया. छात्रों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए सीखते हुए कमाने की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम रहा. विद्यार्थियों ने आयस्टर मशरूम की स्वादिष्ट रेसिपी का भी आनंद लिया, जिससे यह कार्यशाला शिक्षाप्रद के साथ-साथ आनंददायक भी बनी. इस कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ हेमंत कुमार सिंह ने किया, जबकि डॉ तारा कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KALENDRA PRATAP SINGH

KALENDRA PRATAP SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >