होली खेलने में मस्त रहीं नर्सें, तड़पती रही प्रसूता, नवजात की मौत

शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की घोर लापरवाही से एक नवजात की जान चली गयी. घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात नर्सें मरीज को देखने की बजाय होली खेलने में व्यस्त थीं.

शेरघाटी. शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की घोर लापरवाही से एक नवजात की जान चली गयी. घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात नर्सें मरीज को देखने की बजाय होली खेलने में व्यस्त थीं. लापरवाही और बदइंतजामी की इस हद के कारण आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया, जिससे करीब छह घंटे तक वहां तनाव की स्थिति बनी रही. बवाल बढ़ता देख अस्पताल के सभी कर्मी मरीजों को राम भरोसे छोड़कर भाग खड़े हुए. मामला शेरघाटी शहर के जेपी चौक निवासी धनंजय कुमार की पत्नी रिमझिम कुमारी से जुड़ा है. परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला को रविवार को सुबह करीब पांच बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. धनंजय कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी दर्द से चिल्ला रही थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद किसी नर्स ने ध्यान नहीं दिया. गुहार लगाने पर उल्टे यह सलाह दी गयी कि मरीज को ऊपर-नीचे टहलाएं. दर्द असहनीय होने पर महिला खुद बेड पर लेट गयी, जबकि उस समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था.

जन्म के पांच मिनट बाद थमी सांसें, पट्टी से काटी गयी नाल

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर काफी देर से अस्पताल पहुंचे. लंबी जद्दोजहद के बाद सुबह 8:15 बजे महिला का सामान्य प्रसव हुआ. जन्म के समय बच्चा रो रहा था, लेकिन महज पांच मिनट बाद ही स्वास्थ्य कर्मियों ने नवजात के मौत की सूचना दे दी. परिजनों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया कि अस्पताल में नवजात की नाल काटने और बांधने के लिए धागा तक उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते घाव पर लगाने वाली पट्टी (बैंडेज) का इस्तेमाल किया गया.

अस्पताल में कदम-कदम पर वसूली का आरोप

हंगामे के दौरान मौके पर मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों (शांति देवी, परवीन खातून और रिंकी कुमारी) ने भी अस्पताल की पोल खोल दी. उन्होंने बताया कि यहां मरीजों को बुलाने पर डांटकर भगा दिया जाता है. नॉर्मल डिलीवरी, सीजेरियन, एंबुलेंस सेवा और सफाई के नाम पर भी पैसे वसूले जाते हैं. परिजनों ने सवाल उठाया कि जब हर चीज के लिए पैसा ही देना है, तो फिर इस सरकारी अस्पताल का क्या मतलब है. डॉक्टर भी समय पर मौजूद नहीं रहते हैं.

लिखित शिकायत दर्ज, बीडीओ ने कराया शांत

परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भास्कर और नर्स प्रभा, अंशिका, रामदुलारी, मधु तथा रीता के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गये. नवजात के पिता धनंजय कुमार ने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ उदय कुमार को लिखित शिकायत दी है. इसके अलावा सिविल सर्जन और शेरघाटी के एसडीओ से भी निष्पक्ष जांच की मांग की गयी है. सूचना पर पहुंचे बीडीओ स्नेहिल आनंद ने जांच और कार्रवाई का भरोसा देकर दोपहर 2:30 बजे के करीब आक्रोशित परिजनों को शांत कराया.

विधायक ने सिविल सर्जन को ठहराया जिम्मेदार

घटना की सूचना मिलने पर शेरघाटी विधायक उदय कुमार सिंह भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से बात की. उन्होंने इस पूरी बदइंतजामी का ठीकरा सिविल सर्जन पर फोड़ते हुए कहा कि जिला स्तर पर निगरानी की भारी कमी है. सिविल सर्जन कभी नियमित निरीक्षण नहीं करते. विधायक ने भरोसा दिया है कि वह इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य सचिव और संबंधित मंत्री से करेंगे ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके.

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Published by: Pranjal pandey

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