Gaya Ji News : यूक्रेन की राजधानी कीव निवासी जूलिया कुश्का ने बुधवार को विश्व प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और देवघाट पर अपने ससुर तथा दादा-दादी की दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए पिंडदान किया. पिंडदान का वैदिक कर्मकांड गयापाल पंडा समाज के मुनी लाल कटरियार और अरविंद लाल कटरियार ने संपन्न कराया.
अक्टूबर में विदेशी श्रद्धालुओं के साथ फिर आएंगी गया
इस्कॉन मंदिर के प्रबंधक जगदीश श्याम दास ने बताया कि पिंडदान के बाद जूलिया कुश्का ने कहा कि वह इस वर्ष अक्टूबर में दोबारा गया आएंगी. इस दौरान उनके साथ यूक्रेन, रूस, अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों से एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं का समूह भी होगा, जो पिंडदान और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने के लिए यहां पहुंचेगा.
भगवद्गीता से मिली पिंडदान की प्रेरणा
जूलिया कुश्का ने बताया कि उन्होंने भगवद्गीता का अध्ययन किया है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि पितृ दोष को जीवन में दुखों का एक प्रमुख कारण माना जाता है. पिंडदान एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो पितरों की आत्मा की शांति के साथ-साथ परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक माना जाता है.
वर्षों से भारत की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी हैं जूलिया
जूलिया कुश्का ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने इस्कॉन में पहली दीक्षा ली थी, जिसके बाद उनका आध्यात्मिक नाम 'युत्खेश्वरी राधा' रखा गया. उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2012 से लगातार भारत आ रही हैं और यूक्रेन, रूस, अमेरिका तथा यूरोप के विभिन्न देशों के लोगों को भारत की आध्यात्मिक यात्रा और सनातन संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
Also Read : शेखपुरा रहा बिहार का सबसे गर्म जिला, 37.7°C तापमान के बाद बारिश से मिली राहत
