Gaya Ji News(नीरज कुमार): बकरीद (ईद-उल-अजहा) 28 मई को मनाई जाएगी. गांधी मैदान सहित मस्जिदों, ईदगाहों और कर्बला समेत कई सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग समय में बकरीद की सामूहिक नमाज आयोजित होगी. त्योहार को लेकर बुधवार को बाजारों में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही. सेवइयां, बकरे, बाकरखानी और बकरीद से जुड़े अन्य सामानों की अस्थायी दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की. वहीं वारी रोड, डॉ. वजीर अली रोड, नगमतिया रोड, करीमगंज, जामा मस्जिद रोड और नादरागंज सहित मुस्लिम बहुल इलाकों में सड़क किनारे बकरों की बिक्री होती रही.
‘टीपू सुल्तान’ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र
नगमतिया रोड में मो. अरमान द्वारा बिक्री के लिए लाया गया बकरा ‘टीपू सुल्तान’ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा. बेहतर नस्ल के कारण इसकी बोली 80 हजार रुपये से शुरू हुई है. हालांकि देर शाम तक अरमान को ‘टीपू सुल्तान’ का खरीदार नहीं मिल सका.
हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है बकरीद
कर्बला के खादिम डॉ. सैयद शाह शब्बीर आलम कादरी ने बताया कि ईद-उल-अजहा यानी बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाई जाती है. उन्होंने कहा कि हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म पर अपनी वफादारी दिखाने के लिए अपने बेटे इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे.
बकरीद का पर्व इस्लाम के पांचवें सिद्धांत ‘हज’ को भी मान्यता देता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय बकरा, भेड़ या ऊंट जैसे जानवरों की कुर्बानी देते हैं. कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है—एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरा गरीबों के लिए. इस त्योहार पर इस्लाम धर्म के लोग साफ-पाक होकर नये कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं. नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू होती है.
उन्होंने बताया कि गांधी मैदान में सुबह सात बजे और कर्बला में सुबह 10 बजे बकरीद की सामूहिक नमाज आयोजित होगी.
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