बिहार के इस जिले में तेजी से बढ़ रहे Brain Stroke के मरीज, रोज इतने लोगों की हो रही मौत

Brain Stroke: गया के ANMMCH में इन दिनों ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है. हर दिन यहां 10-12 मरीज इससे शिकार होकर पहुंच रहे हैं. देरी से अस्पताल पहुंचने के चलते आधे मरीजों की मौत हो जा रही है.

Brain Stroke: गया के ANMMCH में इन दिनों ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है. हर दिन यहां 10-12 मरीज इससे शिकार होकर पहुंच रहे हैं. देरी से अस्पताल पहुंचने के चलते आधे मरीजों की मौत हो जा रही है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले आठ दिनों में 80 से अधिक ब्रेन स्ट्रोक के शिकार मरीज यहां भर्ती कराये गये हैं. इसमें 35-36 की मौत हो गयी है. इसका मुख्य कारण रहा है कि समय पर मरीजों को अस्पताल नहीं लाया जाना.

इस वजह से आ रहा ब्रेन स्ट्रोक

अस्पताल में इस बीमारी से निबटने के लिए दवा व डॉक्टरों की व्यवस्था ढंग की दिखती है. अस्पताल पहुंचने पर मरीज को तुरंत ही इलाज मिलने लगता है. इस तरह के मरीजों के लिए यहां इमरजेंसी में आइसीयू की व्यवस्था है. बाहर से लोगों को दवा तक खरीद कर नहीं लाना पड़ता है. अस्पताल उपाधीक्षक एनके पासवान ने बताया कि सर्दियों में तापमान में गिरावट के कारण शरीर की गर्मी को बनाये रखना मुश्किल होने लगता है. इससे खून गाढ़ा होने के चलते रक्त प्रवाह में दिक्कत आने लगती है और ये ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन जाता है.

उन्होंने बताया कि हाइ ब्लड प्रेशर व मधुमेह से जूझ रहे लोगों को अधिक खतरा होता है. ठंड शुरू हाेते ही इसके शिकार मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि ठंड में बुजुर्ग महिला-पुरुष का हर हाल में सावधान रहने की जरूरत है. सबसे अधिक शिकार 50 से अधिक उम्र वाले ही हो रहे हैं.

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क्या है ब्रेन स्ट्रोक?

जानलेवा बीमारियों के बीच एक और खतरनाक बीमारी में ब्रेन स्ट्रोक को माना जाता है. इसे ब्रेन अटैक भी कहते हैं. मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाली नसें ब्लॉक हो जाती हैं या फट जाती हैं. ऐसे में दिमाग की कोशिकाएं फंक्शन नहीं कर पातीं या नष्ट होने लगती हैं. इस तरह से उन कोशिकाओं से नियंत्रित होने वाला शरीर का हिस्सा प्रभावित होता है.

उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, डायबिटीज और धूम्रपान आदि पक्षाघात ( लकवा ) का जोखिम पैदा करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं. इनके अलावा स्ट्रोक अल्कोहल का अत्यधिक सेवन, उच्च रक्त कॉलेस्टेराल स्तर, नशीली दवाइयों का सेवन, आनुवांशिक या जन्मजात परिस्थितियां भी इसके कारण माने जाते हैं. इसका इलाज समय पर नहीं होने से जान जाने का खतरा अधिक हो जाता है. इससे प्रभावित होने पर व्यक्ति के शरीर का कोई एक हिस्सा सुन्न होने लगता है और उसमें कमजोरी या लकवा जैसी स्थिति होने लगती है.

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लेखक के बारे में

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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