महाबोधि मंदिर के स्वर्ण शिखर को किया गया चकाचक

मंदिर के स्वर्ण शिखर परियोजना की 12वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ समारोह

फोटो- गया बोधगया 205-206- समारोह में शामिल श्रद्धालु

फोटो- गया बोधगया 207- साफ-सफाई के बाद चकाचक हुआ सोने की गुंबद

मंदिर के स्वर्ण शिखर परियोजना की 12वीं वर्षगांठ पर आयोजित हुआ समारोह

कार्यक्रम में विभिन्न देशों के बौद्ध मठों के प्रतिनिधियों सहित 300 से ज्यादा श्रद्धालुओं हुए शामिल

मंदिर के गुंबद में लपेटा गया है 289 किलो सोने का पत्तर

वरीय संवाददाता, बोधगया

महाबोधि मंदिर में स्वर्ण शिखर परियोजना की 12वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शनिवार को समारोह आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में 300 से अधिक प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संघों के प्रतिनिधि, स्वर्ण शिखर समिति का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल व कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति शामिल थे. थाईलैंड के उप संघराजा सोमदत, थाईलैंड के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निदेशक, एक मंत्री व कोलकाता स्थित थाईलैंड के महावाणिज्य दूतावास के कंसुलेट जनरल सिरीपोर्न तान्याथेप, महाबोधि महाविहार के मुख्य भिक्षु चालिंदा, केयर टेकर भिक्खु डॉ दीनानंद, भंते डॉ मनोज, बीटीएमसी के सदस्य डॉ अरविंद सिंह सहित विभिन्न बौद्ध देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न मठों के प्रमुख भिक्षु शामिल थे. बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) की सचिव डॉ महाश्वेता महारथी ने अपने संबोधन में थाईलैंड की गोल्डन स्पायर समिति का हार्दिक स्वागत किया व उनके दीर्घकालिक योगदान के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने 2014 में इस परियोजना की शुरुआत को याद किया, जिसमें पवित्र मंदिर के मौजूदा तांबे के शिखर को सोने की चादरों से मढ़ने का काम शुरू किया गया था. यह प्रयास थाईलैंड सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के समर्पण, सटीकता और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ किया गया था. सचिव ने शिखर के रखरखाव, मौसम से प्रभावित हिस्सों की सफाई और इस वर्ष जीर्णोद्धार कार्य के चौथे चरण को पूरा करने में गोल्डन स्पायर टीम के निरंतर समर्पण की भी सराहना की. उन्होंने उन इंजीनियरों, शिल्पकारों और स्वयंसेवकों का विशेष आभार व्यक्त किया जिनके सावधानीपूर्वक मचान निर्माण प्रयासों से दक्षिणी अग्रभाग और ऊपरी स्तूप की सफल सफाई संभव हो पायी. उन्होंने इस पवित्र कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में सहयोग और समर्थन के लिए बोधगया स्थित मेत्ता बुद्धा मंदिर के संचालक का भी हार्दिक आभार व्यक्त किया. समारोह का समापन शांति और कल्याण की प्रार्थना व गोल्डन स्पायर परियोजना की पूरी टीम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ हुआ. सचिव ने कहा कि महाबोधि महाविहार के प्रति उनकी समर्पण भावना से जुड़े ये कार्य सभी संबंधित लोगों को असीम पुण्य और आशीर्वाद प्रदान करते रहेंगे. उल्लेखनीय है कि 289 किलो से ज्यादा वजन के सोने के पत्तर से मंदिर के गुंबद को लपेटा गया है व इसकी साफ-सफाई थाइलैंड के कारीगरों द्वारा हर तीन साल पर किया जाता है.

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Published by: Kalendra pratap singh

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