महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में घुसा बारिश का पानी

बड़े आयोजनों के साथ ही अन्य कार्यक्रमों को लेकर पिछले दो वर्षों से हमेशा सुर्खियों में बने रहने वाला बोधगया में नवनिर्मित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र बरसात की पहली बारिश भी नहीं झेल पाया.

बोधगया. बड़े आयोजनों के साथ ही अन्य कार्यक्रमों को लेकर पिछले दो वर्षों से हमेशा सुर्खियों में बने रहने वाला बोधगया में नवनिर्मित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र बरसात की पहली बारिश भी नहीं झेल पाया. महज एक-डेढ़ घंटे की बारिश के बाद सांस्कृतिक केंद्र के बाहरी परिसर में तो जलजमाव हो ही गया, केंद्र के सभागार में भी पानी घुस गया. सांस्कृतिक केंद्र के लिए ड्रेनेज सिस्टम मुकम्मल नहीं होने का नतीजा यह हुआ कि बाहरी परिसर के साथ-साथ मुख्य सभागार में पानी प्रवेश कर गया व लगभग छह इंच तक पानी का जमाव हो गया. संयोग से इसी वक्त बिपार्ड द्वारा फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया जा रहा था. मंच सहित हॉल की कुर्सियों पर लोग बारिश के बीच बेपरवाह बैठे थे. कार्यक्रम संचालित की जा रही थी. इसी बीच खलबली मचनी शुरू हो गयी. पता चला कि बारिश का पानी सभागार के अंदर प्रवेश करने लगा है. स्थिति को भांपते हुए फेयरवेल पार्टी को जल्द ही समाप्त करा दिया गया व लोग हॉल से निकल कर ऊपरी तल्ले पर जमा हो गये. लोगों में इस बात की चर्चा होने लगी कि आखिर हॉल के अंदर तक पानी कैसे पहुंच गया. निष्कर्ष निकला कि सांस्कृतिक केंद्र का ड्रेनेज सिस्टम मुकम्मल नहीं होने के कारण यह स्थित पैदा हो गयी. इसके बाद इसकी चर्चा बोधगया में आम हो गयी व लोग कहने लगे कि करोडों रुपये की लागत से बनी भवन जिसका अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है, की स्थित ऐसी कैसे हो गयी कि महज एक -दो घंटे की बारिश होने पर भी पानी हॉल के अंदर तक पहुंच गयी. उल्लेखनीय है कि नोड वन के पास कृषि विभाग की जमीन पर लगभग 150 करोड़ की लागत से निर्मित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण किया गया है. यहां 500 व 1500 क्षमता वाले दो वातानुकूलित हॉल बने हैं. यहां सरकारी, राजनीतिक व गैर राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम भी आयोजित होते रहते हैं. इसके लिए भी ड्रैनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं बनाया जाना चिंताजनक है. इस संबंध में बोध गया नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक आनंद ने बताया कि सांस्कृतिक केंद्र का हॉल सतह से करीब पांच-छह फुट नीचे होने व काफी बारिश होने के कारण पानी सभागार तक पहुंच गया. इसके लिए पांच से ज्यादा मोटरपंप लगा कर पानी को निकाला गया. लगभग छह घंटे तक मोटरपंप के सहारे पानी की निकासी की गयी. उन्होंने बताया कि सतह से नीचे होने के कारण जलजमाव होने की स्थिति में मोटरपंप से ही पानी को बाहर निकाला जा सकता है. इसमें ड्रैनेज सिस्टम भी काम नहीं कर पायेगा.

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