Gaya Ji News: जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत गोहिलडीह के घनाभोर जंगल में नदी किनारे 20 अगस्त को मिले अज्ञात युवक के शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है. बरामद शव की शिनाख्त झारखंड के कोडरमा जिला स्थित जयनगर निवासी पिंटू रविदास के रूप में हुई है.
पुलिस ने घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर जंगल में लावारिस मिले काले रंग के बैग, कपड़ों और दस्तावेजों के आधार पर मृतक के परिजनों से संपर्क साधा, जिसके बाद बुधवार को परिजनों ने थाने पहुंचकर शव व सामान की पहचान की.
बैग से मिला सुसाइड नोट, जहरीला पदार्थ और रेलवे टिकट
गुरपा थाना प्रभारी शिवनंदन कुमार के अनुसार, जंगल में मिले बैग और घटनास्थल की जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं:
- मोबाइल और सुसाइड नोट: मृतक के मोबाइल में 13 अगस्त की तारीख का एक व्हाट्सएप बयान मिला है, जिसमें आत्महत्या का जिक्र है. इसके अलावा बैग से मिले एक हस्तलिखित कागज पर पिंटू ने अपनी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराने की बात लिखी है.
- जहरीला पदार्थ: घटनास्थल से मिली दो बोतलों में जहरीले रसायन के अवशेष पाए गए हैं.
- टिकट व रसीद: बैग से अहमदाबाद और मुगलसराय का रेलवे टिकट तथा बाराबंकी में टीटीई द्वारा वसूले गए जुर्माने की रसीद भी बरामद हुई है.
13 अगस्त को निकला था घर से, 17 अगस्त को हुई थी आखिरी बात
परिजनों के अनुसार, पिंटू 13 अगस्त को अहमदाबाद में रह रहे अपने मौसेरे भाई के पास जाने के लिए घर से निकला था:
- 17 अगस्त को परिजनों से उसकी अंतिम बार मोबाइल पर बात हुई, जिसके बाद फोन बंद आने लगा.
- मौसेरे भाई ने बताया कि पिंटू अहमदाबाद पहुंचा था, लेकिन एक मैसेज छोड़ने के बाद अचानक वहां से लापता हो गया था.
- 20 अगस्त को गुरपा के घनाभोर जंगल में उसका शव केवल अंतःवस्त्र (जांघिया) में बरामद हुआ था. पहचान न होने के कारण 72 घंटे सुरक्षित रखने के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
पिता ने ससुराल पक्ष पर लगाया आरोप, ससुर ने नकारा
मृतक के पिता ने मौत की परिस्थितियों को पूरी तरह संदिग्ध बताते हुए पिंटू के ससुराल वालों पर हत्या का शक जताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है:
- दूसरी ओर, पिंटू के ससुर ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि 25 अप्रैल को ही उनकी बेटी की शादी पिंटू से हुई थी और दोनों के रिश्ते बेहद मधुर थे.
गुरपा थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों का विस्तृत बयान दर्ज किया जा रहा है. पुलिस तकनीकी जांच और कॉल डिटेल्स के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि पिंटू अहमदाबाद से गुरपा के जंगलों तक किन परिस्थितियों में पहुंचा.
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