गया. सीयूएसबी के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी) और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामीण बैंकिंग और वित्तीय समावेशन में वैज्ञानिक हस्तक्षेप विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किया गया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नाबार्ड , गया के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) उदय कुमार उपस्थित थे. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस सत्र में विशेषज्ञों द्वारा ग्रामीण बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और कृषि समुदाय के विकास में नाबार्ड व कृषि विभाग की भूमिका को समझाया गया. जिला विकास प्रबंधक ने ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन में नाबार्ड की भूमिका पर विस्तृत जानकारी साझा किया. उन्होंने नाबार्ड की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिनमें विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों की निगरानी व ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी प्रभावी सेवा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शामिल है. उन्होंने समझाया कि नाबार्ड विभिन्न प्रकार के बैंकों की सहायता और निगरानी कैसे करता है, जिससे किसानों व ग्रामीण समुदायों के वित्तीय समावेशन में मदद मिलती है. सत्र के दौरान श्री कुमार ने किसानों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), गव्य विकास योजना, पीएमएफएमइ, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, कृषि अवसंरचना निधि (एआइएफ)आदि शामिल हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को वित्तीय सशक्तीकरण और समग्र विकास प्रदान करना है. सत्र के समापन पर कृषि विभाग के प्रोफेसर प्रो पीके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.
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