magadh university News: मगध विश्वविद्यालय के प्रेमचंद सभागार में मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर हिंदी विभाग तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "हमारे लिए प्रेमचंद" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में देश के विभिन्न शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे.
प्रेमचंद को श्रमशील भारतीय जनता की आवाज बताया
मुख्य अतिथि बीएचयू के पूर्व आचार्य प्रो. अवधेश प्रधान ने मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कहा कि हिंदी विभाग आज भी विश्वनाथ प्रसाद मिश्र की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने प्रेमचंद को स्वतंत्रता संग्राम का नायक और श्रमशील भारतीय जनता की आवाज बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में 1915 के बाद के गांधीवादी आंदोलनों का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है.
कहानियों में अधिक प्रगतिशील नजर आते हैं प्रेमचंद
भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू की प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से उठाया है. उन्होंने कहा कि "सेवासदन", "निर्मला", "प्रेमाश्रम", "गोदान" और "नया विवाह" जैसी कृतियों में सामाजिक यथार्थ का प्रभावी चित्रण मिलता है. उनके अनुसार प्रेमचंद उपन्यासों की तुलना में अपनी कहानियों में अधिक प्रगतिशील नजर आते हैं.
भोजपुरी परिवेश और लोकजीवन पर भी हुई चर्चा
पीजी कॉलेज बड़ागांव के प्रो. प्रकाश उदय ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य का विस्तार समझने के लिए गहन अध्ययन आवश्यक है. उन्होंने "गोदान" के ग्रामीण पात्रों और अवधी-भोजपुरी परिवेश का उल्लेख करते हुए इसे लोकजीवन का सशक्त दस्तावेज बताया. इस अवसर पर उन्होंने अपनी भोजपुरी कविता "का हो, का हाल चाल" का भी पाठ किया.
विद्यार्थियों से समाज चेतना अपनाने का आह्वान
कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विद्यार्थी जीवन में उन्होंने पुस्तकालय में प्रेमचंद की रचनाओं का गहन अध्ययन किया. उन्होंने "पंच परमेश्वर" और "ईदगाह" जैसी कालजयी रचनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से समाज चेतना और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने की अपील की.
कई विभागों के शिक्षक और शोधार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. परम प्रकाश राय और शोधार्थी सुशीला कुमारी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुज कुमार तरुण ने किया. संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पौधा देकर सम्मान किया गया. साथ ही चांदनी बसोया और उनके समूह ने सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी.
