Gaya Ji News: गया जी नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) की बैठक बुधवार को काफी गरमागरम माहौल में संपन्न हुई. बैठक की शुरुआत से ही शहर की सफाई व्यवस्था, नाला-नालियों की सफाई में घोर लापरवाही और नियमों को ताक पर रखकर पैसों की निकासी को लेकर पार्षद और प्रतिनिधि उग्र नजर आए. बैठक में सहायक स्वच्छता पदाधिकारी के मनमाने रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए सर्वसम्मति से उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई करने और उन्हें निगम में काम करने के अयोग्य घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया.
नियम विरुद्ध 40-50 लाख रुपये के भुगतान का आरोप
मेयर की अनुमति से बैठक का संचालन कर रहे सशक्त स्थायी समिति सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि फरवरी माह में ही बोर्ड व स्टैंडिंग कमेटी द्वारा शहर के बड़े नाले-नालियों की सफाई का प्रस्ताव पारित किया जा चुका था. इसके बावजूद अगस्त बीतने को है और शहर के प्रमुख नालों की सफाई अधूरी है.
मोहन श्रीवास्तव ने खुलासा किया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान वॉल पेंटिंग और अन्य मदों में बिना बोर्ड या स्टैंडिंग कमेटी की पूर्व स्वीकृति के ही आंतरिक स्रोत के फंड से 40 से 50 लाख रुपये की निकासी कर ली गई. नियम विरुद्ध तरीके से इस प्रकार पैसे खर्च करना सीधे तौर पर वित्तीय गबन और अनियमितता का मामला बनता है.
नगर आयुक्त विभाग को भेजेंगे रिपोर्ट: मेयर
बैठक में मेयर डॉ. वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने स्पष्ट कहा कि दोनों स्वच्छता पदाधिकारियों का कार्यप्रणाली निगम हित के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु राज्य सरकार (विभाग) को प्रस्ताव भेजा जाए.
सफाई व्यवस्था पर चुन्नू खां और सारिका वर्मा ने कहा कि अगस्त में नाले की सफाई का दावा करना हास्यास्पद है, जमीनी स्तर पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है.
बिना स्वीकृति 1000 से अधिक कर्मचारी रखने पर रोक, आदेश निरस्त
बैठक में सदस्य उपेंद्र कुमार सिंह और मोहन श्रीवास्तव ने मुद्दा उठाया कि निगम में बिना बोर्ड या स्टैंडिंग कमेटी को सूचित किए मनमाने ढंग से कंप्यूटर ऑपरेटरों और 1000 से अधिक दैनिक व एजेंसी कर्मियों की भर्ती कर ली गई है. लिखित तौर पर जॉइनिंग देने से भविष्य में निगम पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा.
इस पर संज्ञान लेते हुए मेयर डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बिना प्रस्ताव पारित किए रखे गए सभी कर्मचारियों के नियुक्ति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर जांच के बाद ही पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी.
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