एमयू हिंदी विभाग में मेधावियों को किया सम्मानित

गया न्यूज : एआइ का हिंदी भाषा के विकास में योगदान विषय पर प्रतियोगिता आयोजित

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एआइ का हिंदी भाषा के विकास में योगदान विषय पर प्रतियोगिता आयोजित

विजेताओं को पदक, पुस्तक व प्रशस्ति पत्र देकर दिया गया सम्मान

वरीय संवाददाता, बोधगया.

मगध विश्वविद्यालय स्थित हिंदी विभाग में बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मेधावी सम्मान समारोह व एआइ का हिंदी भाषा के विकास में योगदान विषय पर राजभाषा संगोष्ठी हुई. छात्र व छात्रा संवर्ग से स्नातकोत्तर हिंदी के शीर्ष मेधावियों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिये गये. भाषण-प्रतियोगिता के पांच विजेताओं को पदक, प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार दिये गये. संगोष्ठी में अतिथियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला. विभागाध्यक्ष प्रो ब्रजेश राय ने सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन खादा, पुष्पगुच्छ व पुस्तक प्रदान कर किया. इस आयोजन में सत्र 2021-23 के हिंदी की छात्रा प्रियंका कुमारी सिन्हा व भव्या भारती को छात्रा संवर्ग में संयुक्त रूप से शीर्ष अंक प्राप्त करने के लिए प्रत्येक को 5500 रुपये का चेक, छात्र संवर्ग के शीर्ष अंक प्राप्तकर्ता पंकज कुमार को 7500 रुपये का चेक प्रदान किया गया. इसके अतिरिक्त उन्हें साहित्यिक पुस्तक व प्रमाणपत्र देकर भी सम्मानित किया गया.

एमयू हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो ब्रजेश कुमार राय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो सिद्धार्थ शंकर, बैंक ऑफ बड़ौदा गया क्षेत्र के प्रमुख संजय कुमार तिवारी, एमयू के सेवानिवृत्त पूर्व हिंदी अध्यक्ष व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो विनय कुमार, एसएस कॉलेज, जहानाबाद के सेवानिवृत्त सहआचार्य डॉ अरुण कुमार व बैंक ऑफ बड़ौदा के राजभाषा विभाग के प्रमुख सुनील राजभर ने उन्हें सम्मानित किया. इस अवसर पर मेधावियों ने स्नातकोत्तर के अपने अनुभवों और आगामी करियर संबंधी योजनाओं को साझा कर कनिष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

एआइ उपयोगी है, पर दुरुपयोग के प्रति सावधानी की जरूरत

संजय कुमार तिवारी ने बैंक ऑफ बड़ौदा का संक्षिप्त इतिहास बताते हुए राजभाषा हिंदी की प्रगति में बैंक के योगदान व उसकी महती योजनाओं के बारे में अपनी बातें रखीं. प्रो ब्रजेश कुमार राय ने हिंदी विभाग के अनुशासित विद्यार्थियों की प्रशंसा करते हुए 30 मई को होने वाले हिंदी भवन के भव्य उद्घाटन समारोह की तैयारियों के बारे में अपनी बात साझा की. डॉ अरुण कुमार ने ओजस्वी वक्तव्य के माध्यम से विद्यार्थियों के उत्साह में वृद्धि की. प्रो सिद्धार्थ शंकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक उपयोग की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए यह बताया कि प्रतिदिन बेहतरीन होते अल्गोरिदम व असीम डेटा संग्रहण के फलस्वरूप एआइ मानव की कल्पना से भी आगे नया आयाम ढूंढ़ कर निकाल रहा है. यह उपयोगी तो है, पर उसके दुरुपयोग के प्रति सावधान भी रहना आवश्यक है. हिंदी भाषा में जितने ज्यादा और सटीक डिजिटल कार्य होंगे, उतने बेहतर परिणाम एआइ से मिलेंगे. यह जो उसके विकास के आयाम को विस्तृत करेंगे. इस अवसर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में प्रो आनंद कुमार सिंह, डॉ अनुज कुमार तरुण व डॉ राकेश कुमार रंजन के निर्णायक मंडल द्वारा घोषित शीर्ष तीन विजेताओं सुमित्रा, रविरंजन व माला को क्रमशः स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक से अतिथियों ने सम्मानित किया. संगीत के शोधार्थी सुनील कुमार व हिंदी की शोधार्थी अर्चना कुमारी को सांत्वना पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र व पुस्तक देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन डॉ परम प्रकाश राय व धन्यवाद ज्ञापन सुनील राजभर ने किया. इस अवसर पर डॉ अम्बे कुमारी, डॉ नेहा कुमारी, डॉ पिंटू कुमार व शोधार्थियों की भी सक्रिय उपस्थिति रही.

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Published by: Kalendra pratap singh

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