मानपुर. गया-नवादा मुख्य मार्ग स्थित सुखदेव पैलेस क्लार्क इन परिसर के सभागार में शुक्रवार को स्टेकहोल्डरस मीट ऑन मेडिशनल प्लांट्स इन बिहार कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जगदलपुर यूनिवर्सिटी के नोडल कॉर्डिनेटर आशीष मजूमदार, मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ महेश कुमार दधीचि, मार्केटिंग ऑफिसर आशीष रोमानी, केवीके मानपुर के वैज्ञानिक डॉ फरहाना खातून, करजरा औषधि चिकित्सालय कॉलेज से जुड़े डॉक्टर रविकांत तिवारी, अमित कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया. कार्यक्रम में औषधीय पौधों के विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने के साथ मगध प्रमंडल की पहाड़ियों पर उगने वाले औषधीय पौधों की रक्षा एवं सुरक्षा के साथ उसके भंडारण पर विस्तार पूर्वक चर्चाएं हुईं. इस कार्यशाला में नक्सलग्रस्त बांकेबाजार से जुड़ी द्रौपदी कुमारी ने लेमनग्रास खेती के बारे में जानकारी दी और उसके उत्पादन के बाद मार्केटिंग की समस्या के साथ पैसे के अभाव की समस्या को सार्वजनिक रूप से बताया. उन्होंने बताया कि महिलाओं का समूह बनाकर लेमनग्रास खेती करनी शुरू की. इसमें बांकेबाजार महिला विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की आधारशिला रखी और ग्रामीण महिलाओं को लेमनग्रास खेती के बारे में जागरूक किया, लेनिक उसका तेल निकालने के बाद बाजार मूल्य नहीं मिल पा रहा है. वहीं टिकारी अनुमंडल क्षेत्र से जुड़े प्रगतिशील कृषक विजय कुमार ने ईख लगाने व ऑर्गेनिक खेती कर उसका गुड़ उत्पादन से जुड़ी बातें रखीं. उनका कहना है कि बाजार में अमूमन 50 रुपये किलोग्राम गुड़ मिलता है तो मेरे गुड़ को कौन 100 रुपये खरीदेगा. समाज में अभी जागरूकता की आवश्यकता है, वही टिकारी के आशीष कुमार सिंह ने बताया कि गया, राजगीर एवं औरंगाबाद, जमुई जिले के पहाड़ियों पर उगने वाले औषधीय पौधों को संरक्षित करने की आवश्यकता है़ इसकी अनुपयोगितता समझ लोग बर्बाद कर देते हैं. उसका जलावन बना दिया जाता है. औरंगाबाद के किसान ने लेमनग्रास, पिपरमेंट, तुलसी, हल्दी, चीना, कुसुम के अलावा अन्य औषधियों गुणों वाली खेती की पर उससे अधिक लाभ अच्छी मार्केटिंग नहीं मिलने से हो रही है. वहीं नाबार्ड के डीडीएम उदय कुमार ने किसानों की समस्याओं पर काम करने और आर्थिक मदद के रूप में बैंक से कर्ज लेने पर बल दिया.
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