राज्य सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल “जांच व उपचार, चिकित्सा आपके द्वार” कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम से किया. गया जिला में कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर व्यापक व्यवस्था की गयी. जयप्रकाश नारायण अस्पताल में विधायक बाराचट्टी, महापौर डॉ वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, डीएम शशांक शुभंकर, सिविल सर्जन डॉ राजाराम प्रसाद, आशा कार्यकर्ता, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ कार्यक्रम में उपस्थित थे.
राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम को टू-वे कम्युनिकेशन के माध्यम से जिले के जयप्रकाश नारायण अस्पताल से सीधे जोड़ा गया. इन स्वास्थ्य संस्थानों में टू-वे कम्युनिकेशन के माध्यम से कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एवं उद्घाटन कार्यक्रम में सहभागिता सुनिश्चित की गयी. इसके अतिरिक्त जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ( सीएचसी ), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ( पीएचसी ) एवं अन्य संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में वेबकास्टिंग के माध्यम से पटना से हो रहे राज्य स्तरीय उद्घाटन कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया.
एनसीडी की स्क्रीनिंग पर विशेष जोर
कार्यक्रम के माध्यम से गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत लोगों की नियमित रूप से बीपी एवं ब्लड शुगर की जांच, ओरल कैंसर एवं स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग तथा अन्य आवश्यक एनसीडी संबंधी जांच की जायेगी. स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध पाये गये मरीजों को आगे की जांच एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श के लिए आवश्यकतानुसार संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जायेगा.
गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए है महत्वपूर्ण पहल
यह कार्यक्रम गैर-संचारी रोग (एनसीजी) की रोकथाम, समय पर पहचान एवं उपचार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन के घर एवं समुदाय के निकट ही गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, प्रारंभिक पहचान, चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उनका उचित प्रबंधन किया जा सके.
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रमुख रूप से उच्च रक्तचाप ( बीपी ), मधुमेह ( शूगर ), ओरल कैंसर (मुख का कैंसर), स्तन कैंसर ( ब्रेस्ट कैंसर) एवं अन्य प्रमुख गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की जायेगी. इसके साथ ही स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाये जाने वाले व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक जांच एवं उपचार तथा जरूरत पड़ने पर उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी.
