Kasturba Vidyalaya News : मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक संजय कुमार चौधरी ने अरवल जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, वलिदाद (कलेर) से जुड़े मामले में दो शिक्षकों को नोटिस थामा दिया है. छात्राओं की सुरक्षा और विद्यालय के नियमों के उल्लंघन के आरोप में दो शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. मामले में एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देने पर विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
छात्राओं से तेल मालिश कराने का है पुराना विवाद
अरवल जिले के वलिदाद स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका विनिता कुमारी पर गंभीर आरोप लगे थे. वर्ष 2025 में छात्राओं से तेल मालिश कराने और मेहंदी लगवाने के आरोप में उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई थी. यह कदम जिला शिक्षा पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर उठाया गया था. अब इसी मामले की जांच की आंच विद्यालय के अन्य शिक्षकों तक भी पहुंच गई है.
एसओपी उल्लंघन पर दो शिक्षकों से मांगा गया जवाब
इस गंभीर मामले में मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक संजय कुमार चौधरी ने कार्रवाई और तेज कर दी है. उन्होंने विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजीव कुमार और तत्कालीन वार्डेन सह अध्यापिका बबली कुमारी को नोटिस भेजा है. अधिकारियों ने पूछा है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की किस मानक संचालन प्रक्रिया के तहत नवपदस्थापित प्रधानाध्यापिका को छात्रावास में रहने की अनुमति दी गई. यह सीधे तौर पर छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ और विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन है.
बाहरी लोगों के परिसर में प्रवेश पर है सख्त प्रतिबंध
शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में आवासीय विद्यालयों के नियमों का स्पष्ट रूप से हवाला दिया गया है. एसओपी के सख्त प्रावधानों के अनुसार वार्डेन या संचालक की अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति का विद्यालय परिसर या छात्रावास में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद प्रधानाध्यापिका को वहां रुकने की इजाजत देना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है. इसी घोर लापरवाही को लेकर शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है.
एक सप्ताह में जवाब नहीं देने पर होगी कड़ी कार्रवाई
क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने दोनों आरोपित शिक्षकों को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है. पत्र में सख्त निर्देश दिया गया है कि निर्धारित अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होने पर यह मान लिया जाएगा कि उन्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है. इस समय सीमा के समाप्त होने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा नियमानुसार आगे की कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
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