बोधगया स्थित प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद का पूरा सहयोग मिला. शुरुआत में इसके जीर्णोद्धार के लिए न्यास पर्षद ने 2008 में एक लाख रुपये का सहयोग कर काम शुरू कराया. इसके बाद बोधगया मठ के माध्यम से भी आठ लाख रुपये का सहयोग किया गया.
तत्कालीन महंत सुदर्शन गिरि ने श्रद्धालुओं को दान के लिए किया प्रेरित
बोधगया मठ के तत्कालीन महंत सुदर्शन गिरि ने मंदिर निर्माण के लिए उनसे जुड़े श्रद्धालुओं को भी प्रेरित किया और मंदिर निर्माण में सहयोग करने की अपील की थी तथा उनसे भी दान प्राप्त किए गए थे. उनके प्रयासों से मंदिर जीर्णोद्धार के काम को गति मिली.
स्व शिवराम डालमिया और पत्नी उषा डालमिया का रहा महत्वपूर्ण योगदान
मंदिर निर्माण में व्यवसायी व समाजसेवी स्व शिवराम डालमिया का भी अहम योगदान रहा और वह तन, मन और धन के साथ मंदिर के जीर्णोद्धार के प्रति समर्पित रहे. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी उषा डालमिया ने भी पूरे समर्पण के साथ श्रीजगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन आदि में सहयोग किया.
धार्मिक न्यास पर्षद ने दो किस्तों में कुल 16 लाख रुपये का दिया अनुदान
इस बीच मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान 2015 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने 15 लाख रुपये का पुनः सहयोग किया. इस तरह श्रीजगन्नाथ मंदिर व श्रीराम जानकी मंदिर के जीर्णोद्धार में न्यास पर्षद द्वारा कुल 16 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग अनुदान के रूप में दिया गया.
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न्यास पर्षद ने श्रीजगन्नाथ मंदिर का प्रबंधन बोधगया मठ को सौंपा
श्रीजगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर 2007 में जीर्णोद्धार कमेटी का गठन किया गया था और 2015 में काम पूरा होने पर 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन पांच वर्षों के लिए किया गया था. इसके बाद पर्षदीय अधिसूचना (दिनांक 24 अगस्त 2021) द्वारा न्यास समिति का कार्यकाल पूरा होने पर न्यास पर्षद ने मंदिर का प्रबंधन बोधगया मठ को सौंप दिया.
उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों, अदालती आदेशों और भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर यह साबित हुआ कि श्रीजगन्नाथ मंदिर बोधगया मठ का अभिन्न अंग है, जिसके बाद परिसंपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन और संचालन का संपूर्ण अधिकार बोधगया मठ को प्रदान कर दिया गया.
