सरकारी विभागों को सामाजिक कार्यकर्ताओं की जरूरत

सीयूएसबी में सामाजिक रक्षा से जुड़े मुद्दों पर दो दिवसीय संगोष्ठी संपन्न

सीयूएसबी में सामाजिक रक्षा से जुड़े मुद्दों पर दो दिवसीय संगोष्ठी संपन्न वरीय संवाददाता, गया. सीयूएसबी के समाजशास्त्र विभाग की ओर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (एनआइएसडी) के सहयोग से सामाजिक रक्षा से जुड़े मुद्दों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय आभासी कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी. इस कार्यशाला का आयोजन कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सामाजिक कल्याण की बदलती गतिशीलताओं तथा भारत में व्यावसायिक हस्तक्षेप की अत्यंत आवश्यकता के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से किया गया था. कार्यशाला का उद्घाटन एनआइएसडी के पूर्व निदेशक और वर्तमान उप निदेशक (प्रशिक्षण एवं निर्माण) डॉ आर गिरिराज के संबोधन से हुआ. उन्होंने भारत में सामाजिक रक्षा तंत्र का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए वृद्धजनों, नशा पीड़ितों सहित विभिन्न संवेदनशील वर्गों के लिए सरकार की ओर से संचालित पहलों पर प्रकाश डाला. डॉ गिरिराज ने सामाजिक कार्य के विद्यार्थियों से सिविल सेवा परीक्षाओं में सम्मिलित होने का आह्वान किया और इस बात पर बल दिया कि सरकारी विभागों को सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे विशिष्ट पेशेवरों की अत्यंत आवश्यकता है. दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग की प्रो अर्चना कौशिक ने सामाजिक रक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर एक सारगर्भित व्याख्यान दिया, जिसमें विशेष रूप से कानून से संघर्षरत बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया गया. प्रो कौशिक ने सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में सामाजिक कार्य पेशे की अनिवार्य भूमिका पर बल देते हुए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को प्रणालीगत परिवर्तन के लिए अत्यंत आवश्यक बताया. इस कार्यक्रम में एनआइएसडी के परामर्शदाता संजय पवार, श्वेता सहगल और अनुष्का भारद्वाज ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किये. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. एम विजय कुमार शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया. संगोष्ठी में दिल्ली की प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और बाल संरक्षण समिति की पूर्व अध्यक्ष मीनू मेहता ने पुनर्वास की जटिलताओं पर जमीनी स्तर का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कमजोर वर्गों के बचाव और मुख्यधारा में लाने से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को साझा किया. उन्होंने भिक्षावृत्ति और बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के अंतर्संबंध को रेखांकित करते हुए पुनर्वास के लिए अधिक मानवीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया. विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा परामर्शदाता अनुष्का भारद्वाज ने चर्चाओं में सहयोग प्रदान किया. इस कार्यक्रम में विभाग के प्रो. अनिल कुमार सिंह झा, प्रो. समापिका मोहापात्रा, डॉ हरेश नारायण पांडेय, डॉ जितेंद्र राम, डॉ प्रिय रंजन, डॉ पारिजात प्रधान और डॉ अहमदुल कबीर एपी भी शामिल हुए. कार्यशाला में शोधार्थियों, मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) और समाजशास्त्र के विद्यार्थियों तथा यूजी-पीजी एकीकृत पाठ्यक्रमों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय सहभागिता करते हुए भिक्षावृत्ति से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका तथा सभी नागरिकों की गरिमा सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Kalendra pratap singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >