गयाजी में मासूम को मिला इंसाफ, लेकिन परिवार अब भी बेबस, ढाई साल बाद भी सरकारी योजनाओं का नहीं मिला लाभ

Gayaji News: करीब ढाई वर्ष पूर्व उचिरवां गांव में छह वर्षीय बच्ची का बुरी नीयत से अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था.

GayaJi News: (शेरघाटी से नवीन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट)
शेरघाटी प्रखंड के उचिरवां गांव में छह वर्षीय बच्ची के अपहरण और निर्मम हत्या के चर्चित मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. घटना के ढाई साल बाद भी परिवार को सरकार और प्रशासन की ओर से किए गए अधिकांश वादों का लाभ नहीं मिल पाया है.

ढाई साल पहले हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात

करीब ढाई वर्ष पूर्व उचिरवां गांव में छह वर्षीय बच्ची का बुरी नीयत से अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था. मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित संदीप और गौतम को गिरफ्तार किया था. बाद में गया की पॉक्सो अदालत ने दोनों दोषियों को एक लाख 20 हजार रुपये जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई.

सजा मिली, लेकिन परिवार की जिंदगी नहीं बदली

न्यायालय से दोषियों को सजा मिलने के बावजूद पीड़ित परिवार की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है. परिवार आज भी झोपड़ीनुमा घर में रहने को मजबूर है. माता-पिता समेत नौ सदस्य एक ही कमरे में किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं. परिजनों का कहना है कि घटना के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कई वादे किए थे, लेकिन अधिकांश आज तक पूरे नहीं हुए.

आवास, राशन और आधार कार्ड का इंतजार

घटना के समय पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया था. परिवार का आरोप है कि ढाई साल बीतने के बाद भी न तो सभी सदस्यों का आधार कार्ड बन पाया और न ही नया राशन कार्ड जारी हुआ. बैंक खाता खोलने और आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी अधूरी पड़ी है.

नौ सदस्यों के परिवार को मिल रहा सिर्फ चार किलो राशन

परिजनों के अनुसार वर्तमान में परिवार के दादा के नाम पर ही राशन कार्ड है, जिसके आधार पर मात्र चार किलो राशन मिलता है. जबकि परिवार में कुल नौ सदस्य हैं. ऐसे में भोजन और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करना बड़ी चुनौती बना हुआ है.

आज भी ताजा है उस दर्दनाक रात की याद

परिवार के लोगों ने बताया कि घटना के समय बच्ची अपने माता-पिता के साथ घर के बाहर सो रही थी. उसी दौरान अपराधियों ने उसका अपहरण कर लिया था. पीड़ित मां संगीता देवी और पिता शिवा मंडल का कहना है कि उस घटना का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है. ऊपर से बदहाल आर्थिक स्थिति ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

ग्रामीणों ने उठाए प्रशासन पर सवाल

गांव के लोगों का कहना है कि घटना के बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन उनका लाभ अब तक पीड़ित परिवार तक नहीं पहुंच सका. ग्रामीणों का मानना है कि यदि इतने चर्चित मामले के पीड़ित परिवार को भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है.

बुनियादी सुविधाओं की आस में परिवार

पीड़ित परिवार आज भी आवास, राशन, आधार कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठा है. परिजनों का कहना है कि दोषियों को सजा मिलने से न्याय जरूर मिला, लेकिन जब तक परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक उनकी लड़ाई अधूरी रहेगी.

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By Sakshi Kumari

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