Gayaji News: (टनकुप्पा प्रखंड से धर्मपाल सिंह की रिपोर्ट)
गयाजी जिले के टनकुप्पा प्रखंड के गजाधरपुर और बरसौना गांव में कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर द्वारा आयोजित “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को मिट्टी की सेहत बचाने और वैज्ञानिक खेती अपनाने का संदेश दिया गया. कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया कि उर्वरकों के असंतुलित उपयोग, विशेषकर अधिक यूरिया डालने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है. अभियान में 84 किसानों ने भाग लेकर टिकाऊ खेती की तकनीकों की जानकारी हासिल की.
बरसौना गांव में जुटे किसान और कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गया की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा जांच आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. कार्यक्रम के दौरान “स्वस्थ धरा-खेत हरा” का संदेश देते हुए किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित किया गया.
अधिक यूरिया के इस्तेमाल पर वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अत्यधिक यूरिया और असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है. उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने तथा जैविक एवं जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने की सलाह दी. इसके अलावा हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन और संतुलित पोषण के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई.
दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए अरहर की खेती का सुझाव
कार्यक्रम में किसानों को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए उच्च भूमि और खेतों की मेड़ पर अरहर की खेती करने का सुझाव दिया गया. वैज्ञानिकों ने बताया कि इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
मिट्टी जांच के बिना खेती नहीं करने की अपील
ICAR-RCER, पटना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनिभूषण ने खरीफ फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन, मिट्टी जांच की उपयोगिता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी. वहीं वैज्ञानिक डॉ. गौस अली ने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराने और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार खेती करने की अपील की, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और फसल उत्पादन में वृद्धि हो सके.
पूरे जून माह चलेगा जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से “खेत बचाओ अभियान” से अधिक से अधिक जुड़ने और अपने गांवों में अन्य किसानों को भी जागरूक करने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि यह जागरूकता अभियान पूरे जून माह तक विभिन्न गांवों में चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें.
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