Gayaji News: (गयाजी से रोशन कुमार की रिपोर्ट)
बोधगया मठ और वहां के संतों के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से झूठा और भ्रामक प्रचार करने के मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. मठ के महंत त्रिवेणी गिरि की शिकायत पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
फेसबुक पोस्ट पर भड़का विवाद
महंत त्रिवेणी गिरि ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि 27 मई को फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर बोधगया मठ के संतों के संबंध में आपत्तिजनक और भ्रामक बातें लिखी गईं. पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि मठ के कुछ तथाकथित संत पैसों के लालच में मठ को बौद्ध प्रचार का केंद्र बना रहे हैं. महंत ने इस आरोप को पूरी तरह असत्य, निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है.
धार्मिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश का आरोप
महंत का कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई इस तरह की पोस्ट का उद्देश्य मठ की प्रतिष्ठा को धूमिल करना और हिंदू तथा बौद्ध समुदायों के बीच तनाव और वैमनस्य पैदा करना है. उन्होंने वरीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष मामले को उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.
आईटी एक्ट और बीएनएस की कई धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
महंत त्रिवेणी गिरि के बयान के आधार पर साइबर थाने में आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) के अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 197, 299, 302, 353(2) और 356 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
तेजतर्रार इंस्पेक्टर को सौंपी गई जांच
मामले की जांच की जिम्मेदारी बोधगया सर्किल इंस्पेक्टर मोहम्मद सरफराज इमाम को सौंपी गई है. उन्हें इस कांड का अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) बनाया गया है. पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक अनुभवी और तेजतर्रार अधिकारी के रूप में की जाती है. पुलिस अब संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्रोत और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुट गई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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