गया जी से नीरज की रिपोर्ट
Gaya Satellite Township Project: गया जी में सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना और लैंड पुलिंग नीति के विरोध में अखिल भारतीय किसान महासभा ने सोमवार को प्रतिवाद मार्च निकाला. गांधी मैदान गेट संख्या तीन से शुरू हुआ मार्च समाहरणालय पहुंचा, जहां सभा आयोजित की गई. इसके बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा.
Gaya Satellite Township Project: प्रतिवाद मार्च क्यों निकाला गया?
दरअसल, अखिल भारतीय किसान महासभा ने सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना और लैंड पुलिंग नीति के विरोध में सोमवार को प्रतिवाद मार्च निकाला. संगठन का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने के उद्देश्य से यह प्रदर्शन आयोजित किया गया.
Gaya Ji Protest: किसान महासभा के सचिव के नेतृत्व में निकला मार्च
किसान महासभा के सचिव बालेश्वर प्रसाद यादव के नेतृत्व में प्रतिवाद मार्च गांधी मैदान के गेट संख्या तीन से शुरू हुआ. इसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. मार्च समाहरणालय तक पहुंचा. समाहरणालय पहुंचने के बाद प्रतिवाद मार्च सभा में बदल गया. सभा में मौजूद लोगों ने संगठन के मुद्दों को रखा.
गया जी की खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें
Bihar Satellite Township Project: सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना क्या है?
सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के तहत किसी बड़े शहर के बाहरी इलाके में एक सुनियोजित और आधुनिक छोटा शहर बसाया जाता है. इसका उद्देश्य मुख्य शहर पर बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं के दबाव को कम करना है. इन टाउनशिप में आवास, स्कूल, अस्पताल, बाजार, पार्क, सड़कें और रोजगार के साधन विकसित किए जाते हैं, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुख्य शहर पर निर्भर न रहना पड़े. यह टाउनशिप मुख्य शहर से सड़क, हाईवे या अन्य परिवहन सुविधाओं के जरिए अच्छी तरह जुड़ी होती है. बता दें कि, बिहार के 11 प्रमुख शहरों को आधुनिक ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा रहा है.
लैंड पूलिंग नीति क्या है?
लैंड पूलिंग नीति जमीन अधिग्रहण का एक आधुनिक और किसान-अनुकूल मॉडल है. इसमें किसान अपनी जमीन का एक हिस्सा स्वेच्छा से सरकार या विकास प्राधिकरण को देते हैं. सरकार उस जमीन पर सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करती है. इसके बाद विकसित जमीन का तय हिस्सा (बिहार की नीति में 55%) वापस किसानों को लौटा दिया जाता है, जबकि शेष जमीन का उपयोग सार्वजनिक सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए किया जाता है. विकसित होने के बाद किसानों को मिलने वाले प्लॉट की बाजार कीमत पहले की तुलना में काफी बढ़ जाती है, जिससे उन्हें विकास का सीधा आर्थिक लाभ मिलता है.
Also Read: गया-कोडरमा रेलखंड पर आरपीएफ ने जहानाबाद के युवक को किया गिरफ्तार, छह बोतल विदेशी शराब बरामद
