गया. सीयूएसबी के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग ने ट्रांसजेंडर अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (एनआइएसडी), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रायोजित किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में दोस्ताना सफर, पटना की संस्थापक डॉ रेशमा प्रसाद ने अपने संबोधन में भारत में इस समुदाय को अपनी स्वयं की पहचान चुनने के लिए स्वीकृति और स्वतंत्रता की आवश्यकता के बारे में बात की. उन्होंने हमारे घरों को उनके लिए सुरक्षित स्थान बनाने पर भी जोर दिया ताकि गरिमा गृह (ट्रांसजेंडर के लिए आश्रय गृह) स्थापित करने की कोई जरूरत न हो. मुख्य अतिथि ने अपनी प्रस्तुति में लिंग और कामुकता के अंतः क्रियाशीलता और उनके दैनिक जीवन में ट्रांसजेंडरों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं और चुनौतियों पर जोर दिया. डॉ प्रसाद ने विभाग के समाज कार्य के छात्रों के लिए प्लेसमेंट ब्रोशर (विवरणिका) का भी विमोचन किया. कुलपति प्रो के एन सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि यदि हम ट्रांसजेंडर समुदाय को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि जैसे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से अलग-थलग और भेदभाव करते रहेंगे तो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है. उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर को अधिक लिंग समावेशी बनाने और इस तरह के जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया.
ट्रांसजेंडर के जीवन और उनके अनुभवों से संबंधित एक लघु वृत्तचित्र प्रस्तुत
पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एम विजय कुमार शर्मा के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने डॉ रेशमा प्रसाद को देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए 30 वर्षों से अधिक समय से कर रहे उनके अनुकरणीय कार्य के लिए बधाई दी. कार्यशाला के संयोजक डॉ हरेश नारायण पांडे ने ट्रांसजेंडर के ऐतिहासिक अस्तित्व, उनके आंदोलनों और अधिक मान्यता और संरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई, ट्रांसजेंडर अधिनियम, 2019 और भारतीय समाज में उनकी पहचान और सामाजिक समावेश के लिए नियम 2020 पर प्रकाश डाला. परीक्षा नियंत्रक डॉ शांतिगोपाल पाइन ने विभाग की ऐसी पहल की सराहना की और भारत में जागरूकता कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला. ट्रांसजेंडर के जीवन और उनके अनुभवों से संबंधित एक लघु वृत्तचित्र दिखाया गया.
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