गया़ एएनएमएमसीएच से मरीजों को रेफर किये जाने या फिर मौत के बाद परिजनों को सरकारी एंबुलेंस व मर्चरी वैन लेने में एड़ी-चोटी एक करनी पड़ती है. इसके बाद भी सभी को एंबुलेंस या मर्चरी वैन नहीं मिल पाता है. कई बार परिजन व यहां के कर्मचारियों के बीच मारपीट की नौबत आ चुकी है. किसी तरह मामले को संभाला जाता है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पांच एंबुलेंस अस्पताल को दिये गये हैं. इसमें दो पूरी तौर से खराब व एक का वेंट नहीं चलता है. दो एंबुलेंस ही मरीजों को सुरक्षित गणतव्य तक पहुंचा रहे हैं. यहां से हर दिन 10-12 मरीजों को रेफर किया जाता है. सभी को हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस यहां से उपलब्ध नहीं हो पाते. इसके साथ ही छह से आठ प्रसूताओं को अस्पताल से हर दिन छुट्टी मिलने पर उन्हें घर तक एंबुलेंस ही छोड़ने का नियम है. इन्हें भी कई बार एंबुलेंस नहीं मिल पाता है. मर्चरी वान दो होने के चलते यहां हर दिन इसको लेकर दिक्कत आती है. प्राइवेट एंबुलेंस वालों का ही सहारा परिजनों को लेना पड़ता है. इसके लिए उन्हें मनमाना पैसा देना पड़ता है.
कई बार पत्र देने के बाद भी नहीं मिल रहे एंबुलेंस
बड़ा अस्पताल होने के चलते यहां पर एंबुलेंस की अधिक आवश्यकता होती है. एंबुलेंस को लेकर परिजन हंगामा हर दिन करते हैं. उन्हें एंबुलेंस नहीं मिल पाता है. कई बार इस संबंध में विभाग के अधिकारी को पत्र दिया गया. लेकिन, अब तक एंबुलेंस नहीं दिये गये हैं. विभाग से छह एंबुलेंस व तीन मर्चरी वैन की मांग की गयी है. इसके मिलने के बाद ही स्थिति को व्यवस्थित किया जा सकेगा.
डॉ केके सिन्हा, अधीक्षक, एएनएमएमसीएचडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
