इमामगंज. भाकपा माओवादियों के रीजनल कमांडर सह बिहार-झारखंड में 13 लाख रुपये के ईनामी विवेक यादव की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इससे क्षेत्र में सनसनी है. विवेक यादव को लोग सुनील यादव, कारा जी, ब्रेट जी, राजेंद्र उर्फ बूटी जी के नामों से भी जानते थे. घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक यह गुत्थी नहीं सुलझ पायी है कि आखिर विवेक यादव को गोली किसने मारी. विवेक यादव को दो गोली मारी गयी है. इसमें एक छाती और दूसरी गर्दन में दागी गयी है. डुमरिया थाना क्षेत्र के मंझौली गांव के नजदीक पक्का बांध के समीप शव मिला था. शुरुआत में जिला पुलिस, एसटीएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी सहित खुफिया विभाग शव का शिनाख्त नही कर पा रहे थे. इसी बीच इनपुट मिला कि शव नक्सली विवेक यादव का है. इसकी पुष्टि मृतक की पत्नी ममता देवी ने मेडिकल कॉलेज में जाकर की.
आपसी कलह में तो नहीं गयी जान!
जानकार बताते हैं कि संदीप यादव की मौत के बाद इस क्षेत्र की कमान विवेक यादव के कंधों पर संगठन ने सौंपी थी. 25 दिसंबर 2023 में लुटुआ थाना क्षेत्र के असुराइन गांव के नजदीक बन रहे पुल के कर्मचारियों को अगवा कर विवेक यादव सुर्खियों में आया था. हालांकि पुलिस की दबिश के कारण तीसरे दिन ही कर्मचारियों को नक्सलियों ने रिहा कर दिया था. ठेकेदारों से लेवी वसूल करने में विवेक दिन रात जुटा हुआ था. कम समय में ही संगठन में बेहतर परफॉर्मेंस दिखलाया और इसका कद बढता ही चला गया.अब प्रश्न उठता है कि विवेक यादव की हत्या किसने की? क्षेत्र में अमूमन देखा जाता रहा है कि जब भी नक्सली संगठन का सदस्य संगठन से गद्दारी करता हुआ पकड़ा जाता है तब शीर्ष नेतृत्व ही उसे सजा देता रहा है. जिसकी जिम्मेवारी स्वयं संगठन लेता है. परंतु विवेक यादव की हत्या में ऐसा देखा नहीं गया है. इससे ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. प्रश्न उठता है कि कहीं विवेक के जानने वाले लोगों ने ही चक्रव्यूह रचकर हत्या तो नहीं की. सूत्रों के अनुसार, विवेक के कपड़े से पुलिस के एक पर्चा बरामद किया है. जिसमे लेवी के लिए कई ठेकेदारों से मिलने वाली राशि का जिक्र है.
विवेक की पारिवारिक पृष्ठभूमि
कोठी थाना क्षेत्र के कनरगढ़ गांव के रहने वाले स्व बुटाली यादव के चार पुत्रों व दो पुत्रियों में सबसे छोटा विवेक यादव था. विवेक यादव की माता स्व कुंती देवी के निधन के बाद वह अकेला हो गया. वह माओ के सिद्धांत से प्रभावित होकर वर्ष 2001 में नक्सली के दस्ता में शामिल हो गया. जानकार बताते हैं कि वर्ष 2016-17 में शादी कर ली. शादी के बाद दो पुत्रियां एवं एक पुत्र का जन्म हुआ. परंतु पुत्र की आकस्मिक मौत के बाद दो पुत्री ही विवेक की हैं. ग्रामीणों ने बताया कि विवेक यादव नक्सली कांडो में वर्ष 2005 में जेल जा चुका है. जेल से छूटने के बाद पुनः नक्सल दस्ता में ही शामिल हो गया. विवेक की हत्या के बाद परिजनों ने डरौना नाला स्थित शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया. जहां सहोदर भाई जग्रनाथी यादव ने नम आंखों से मुखाग्नि दी. परिजनों ने हत्या में शामिल लोगो को गिरफ्तार करने की मांग की है. इस संबंध में विवेक के साला अरुणेश यादव ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. विवेक की हत्या के बाद परिवार को सरकारी मदद मिले इसके लिए उन्होंने शासन प्रशासन से गुहार लगायी है.दर्ज हैं कई प्राथमिकी
विवेक यादव पर इमामगंज पुलिस अनुमंडल के कई थानों में संगीन घाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है. इमामगंज पुलिस अनुमंडल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार डुमरिया में चार, लुटुआ में पांच एवं इमामगंज, कोठी व छकरबंधा थाना में एक-एक प्राथमिकी दर्ज है. इसके अलावा भी बिहार और झारखंड राज्य के कई थानों में संगीन घराओं के तहत मामला दर्ज है.डुमरिया थाने के चौकीदार के बयान पर दर्ज हुई प्राथमिकी
शव मिलने के बाद डुमरिया थाने के चौकीदार शिवनंदन पासवान ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. हालांकि शव को पोस्टमार्टम कराने तक पुलिस पहचान नहीं कर पायी थी. इसी को पुलिस ने चौकीदार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई में जुटी रही. देर शाम यह स्पष्ट हुआ कि अज्ञात शव किसी दूसरे का नहीं, बल्कि 13 लाख रुपये के इनामी नक्सली विवेक यादव का है. प्राथमिकी में यह भी दर्ज है कि पहने कपड़े से पर्चा निकला है. जिसे वरीय अधिकारियों ने जब्त कर लिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
