जीतेंद्र मिश्रा, गया
जिले के सभी अस्पतालों में गाइनोकॉलोजिस्ट की कमी दिख रही है. जिले के प्रभावती अस्पताल में महिला चिकित्सक की कमी के कारण सप्ताह में तीन दिन ही ऑपरेशन हो रहस है, तो बोधगया व मानपुर में गाइननेकॉलोजिस्ट के बदले सर्जन ही गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन करते हैं. हाल के दिनों में देखा जाये, तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से व्यवस्था में सुधार का हर संभव प्रयास किया गया. महिलाओं के लिए स्पेशल रूप से प्रभावती अस्पताल में एक डिग्रीधारी गाइनेकॉलोजिस्ट व एक डिप्लोमाधारी पोस्टेड हैं. यहां हर दिन ओपीडी में 60-70 गर्भवती महिलाओं का उपचार होता है. इसके अलावा नौ-10 मरीज हर दिन भर्ती होती हैं. यहां पर डॉक्टर की कमी के चलते मंगलवार, गुरुवार व शुक्रवार को ही गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन होता है. बाकी दिन ऑपरेशन योग्य मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है. गर्भवती महिलाओं के इलाज की ढंग की व्यवस्था नहीं होने के चलते ही प्राइवेट अस्पतालों की चांदी रहती है. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी में जहां गर्भवती महिलाओं को जरूरत पड़ने पर मुफ्त में ऑपरेशन होता है, तो प्राइवेट अस्पतालों में मरीज को ऑपरेशन का 40 से 80 हजार तक देना पड़ता है.यहां होती है सभी को दिक्कत
सभी प्रखंड में गर्भवती महिलाओं के इलाज की व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में नहीं होने के कारण जरूरतमंदों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. प्रखंड के बाजार में बहुत सारे प्राइवेट अस्पताल खोल लिये गये हैं. यहां पर ही लोग मजबूरी में फंस जाते हैं. किसी तरह की विषम परिस्थिति आने पर प्राइवेट अस्पतालों से भी दूसरे जगह अपने परिचित वाले गया-पटना के हॉस्पिटल में रेफर कर दिया जाता है. वहां पर मरीजों को मनचाहा आर्थिक शोषण किया जाता है. सरकारी अस्पताल से भी प्राइवेट अस्पताल के दलाल भी मरीज बहलाकर अपने साथ ले जाते हैं.बिल्डिंग हो गये बेहतर पर व्यवस्था नहीं
मुख्यालय के प्रभावती अस्पताल की बेहतर बिल्डिंग बनायी गयी है. इसके साथ ही यहां पर अत्याधुनिक संसाधन को लगाया गया है. 100 बेड का चकाचक अस्पताल बनने के बाद भी मरीजों को कोई खास फायदा नहीं हो रहा है. यहां पर डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं होने के चलते सप्ताह में कुछ दिन ही ऑपरेशन होता है. विषम परिस्थिति में तुरंत ही मरीज को मगध मेडिकल रेफर कर दिया जाता है. लोगों ने बताया कि बिल्डिंग के साथ अन्य तरह की व्यवस्था मिलने के बाद ही लोगों को इसका फायदा मिल सकेगा.क्या कहते हैं स्वास्थ्य डीपीएम
जिले में प्रभावती, जेपीएन सदर हॉस्पिटल के अलावा टिकारी, शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल व बोधगया-मानपुर पीएचसी में गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन की व्यवस्था है. टिकारी में तीन व शेरघाटी में दो गाइनेकॉलोजिस्ट हैं. बोधगया व मानपुर में सर्जन से काम लिया जा रहा है. इसके अलावा सदर व प्रभावती अस्पताल में थोड़ी कमी है. लेकिन, इतनी व्यवस्था में ही बेहतर काम करने का प्रयास किया जा रहा है. जिले में मेडिकल कॉलेज में सबसे अच्छी व्यवस्था है. किसी तरह की विषम परिस्थिति होने पर मरीज को मेडिकल कॉलेज ही रेफर किया जाता है. आनेवाले दिनों में स्त्री रोग विभाग की और बेहतर व्यवस्था करने के प्रयास किये जा रहे हैं. सभी जगहों पर बंध्याकरण की व्यवस्था है. बेलागंज में एक संस्था की ओर से कैंप लगाकर बंध्याकरण में गड़बड़ी की बात सामने आने पर संस्था को बैंड कर दिया गया है. समय-समय पर हर जगह कैंप लगाकर बंध्याकरण कराया जाता है.नीलेश कुमार, स्वास्थ्य डीपीएम – फोटो- गया- 02एएनएमएमसीएच में दिखती है बेहतर व्यवस्थाजिले के मेडिकल कॉलेज में एक अलग यूनिट ही नयी बिल्डिंग में गइनो के मरीजों के चलायी जाती है. पूरी बिल्डिंग में बेहतर व्यवस्था की गयी है. यहां केेेेे पर डॉक्टरों की टीम 24 घंटे मौजूद रहती हैं. इनके साथ अलग से एनेस्थेटिक भी तैनात रहते हैं. यहां पर हर दिन पांच से आठ ऑपरेशन किया जाता है. किसी समय विषम परिस्थिति में मरीज के आने पर ऑपरेशन में तनिक भी देर नहीं की जाती है. यहां पर गाइनो विभाग के हेड डॉ लता शुक्ला द्विवेदी व अधीक्षक डॉ केके सिन्हा की निगरानी हर वक्त रहती है. जिले के अलावा आसपास के जिलों के साथ झारखंड के कुछ हिस्सों से भी यहां इलाज कराने मरीज पहुंचते हैं. हर दिन ओपीडी स्त्री रोग विभाग में 200 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की हर वक्त कोशिश रहती है कि हर विभाग में इलाज के बेहतर सुविधा लोगों को उपलब्ध कराया जाये. इसके बाद भी महिलाओं को हर वक्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. किसी को दिक्कत होने नहीं दी जाती है. देर रात में ऑपरेशन की जरूरत होने पर डॉक्टर की टीम मौजूद रहते हैं. यहां पर डॉक्टरों की कमी नहीं है.
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