Gaya News(हरिबंश कुमार): गया शहर में आधुनिक चिड़ियाघर धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी गई है. इसी संबंध में विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने वन विभाग के साथ सोमवार को अतिथि गृह में समीक्षा बैठक की. समीक्षा के दौरान जिले में चल रही पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं वन विस्तार योजनाओं की विस्तृत चर्चा की. बैठक में गया वन प्रमंडल पदाधिकारी सहित वन विभाग के अन्य अफसर उपस्थित रहे.
गया में 45 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा चिड़ियाघर
बैठक के दौरान डॉ प्रेम कुमार ने बताया कि गया जी के कंडी क्षेत्र में 45 हेक्टेयर भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त चिड़ियाघर का निर्माण कराया जायेगा. इसके प्रथम चरण के लिए भारत सरकार को लगभग 195 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है. प्रस्तावित चिड़ियाघर में करीब 34 प्रकार के वन्य जीवों को रखने की योजना है. उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित होगी.
दो महीने के अंदर पार्क निर्माण कार्य का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि पटना चिड़ियाघर लगभग 190 एकड़ क्षेत्र में तथा राजगीर जू सफारी लगभग 260 एकड़ क्षेत्र में विकसित है. इसी तर्ज पर गया जी में भी आधुनिक वन्यजीव एवं पर्यावरणीय संरचना विकसित की जायेगी. साथ ही कंडी, नवादा और बोधगया में अगले दो माह के भीतर पार्क निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.
इस साल 24 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, 19 नर्सरियों में 18 लाख पौधे तैयार
बैठक में ग्रीन गया को लेकर पौधारोपण योजना पर भी चर्चा हुई. पौधारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले की 19 नर्सरियों में लगभग 18 लाख 376 पौधे तैयार किये जा रहे हैं. वहीं इस वर्ष पूरे गया जी में लगभग 24 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें वन क्षेत्रों में करीब पांच लाख पौधे लगाये जायेंगे. नर्सरी में महोगनी, शीशम, अमरूद, पीपल, पाकड़ सहित अन्य पौधे तैयार किये गये हैं.
आइकार्ड दिखाने पर बच्चों को मिलेंगे मुफ्त में पांच पौधे
डॉ कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए कहा कि स्कूली बच्चों को जागरूक करने के लिए परिचय पत्र जमा करने वाले छात्रों को वन विभाग की ओर से पांच-पांच पौधे निशुल्क दिये जायेंगे. इसके अलावा जीविका दीदियों के माध्यम से भी लगभग पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हरित आवरण बढ़ाने, पर्यावरण संतुलन बनाये रखने और गया जी को “ग्रीन गया” के रूप में विकसित करने के लिए सभी योजनाओं को समयबद्ध व प्रभावी ढंग से लागू किया जाये.
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