Gaya News : अधजली लकड़ियों से किया जा रहा दाह संस्कार, ठेलाें पर ढोए जा रहे शव

Gaya News : लावारिस शवों को अंतिम संस्कार के समय भी इंसाफ नहीं मिल पा रहा है. लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है.

गया जी. लावारिस शवों को अंतिम संस्कार के समय भी इंसाफ नहीं मिल पा रहा है. लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है. शवों को घटनास्थल या अस्पताल से श्मशानघाट तक लाने के लिए वाहन तक की व्यवस्था नहीं की जाती है. कई मामलों में शव को ठेला पर रखकर श्मशानघाट भेज दिया जाता है. शहर में रोजाना एक-दो बार ठेला पर शव ले जाते देखे जा सकते हैं. खुले में इस तरह शव ले जाने की तस्वीरें लोगों को विचलित कर देती हैं, जबकि सरकार की ओर से लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है. इसके बावजूद नियमों का शायद ही कहीं पालन हो रहा है. श्मशानघाट से मिली जानकारी के अनुसार अस्पतालों से लावारिस शवों को पुलिस के माध्यम से यहां लाया जाता है. अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाली राशि इतनी कम होती है कि अधजली लकड़ियों से ही शव का दाह संस्कार किया जाता है. जो राशि दी जाती है, उससे शव जलाने के लिए पर्याप्त लकड़ी तक नहीं खरीदी जा सकती है. रेलवे से मिलने वाले लावारिस शवों को भी ठेला पर ही एक व्यक्ति श्मशानघाट तक लाता है. वही व्यक्ति अधजली लकड़ियां चुनकर शव में आग लगाकर चला जाता है. कई बार शव पूरी तरह नहीं जल पाता है, ऐसे में श्मशानघाट के आसपास के दुकानदार किसी तरह शव को जलाने का प्रयास करते हैं.

वर्षों से 3000 रुपये में हो रहा अंतिम संस्कार

लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए पिछले करीब दो दशकों से मात्र 3000 रुपये ही दिये जा रहे हैं. बढ़ती महंगाई के बावजूद इस राशि में अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी है. श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाली कम राशि के कारण लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार संभव नहीं हो पा रहा है. कोरोना काल के दौरान निगम की ओर से शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गयी थी. उस समय हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार के लिए 9000 रुपये और मुस्लिम रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार के लिए 8850 रुपये की राशि दी जाती थी. अब जब महंगाई और अधिक बढ़ चुकी है, तब भी लावारिस शवों के लिए 3000 रुपये दिये जाना हैरान करने वाला है.

पहले ही निर्देश दे चुका है कोर्ट

कोर्ट एक मामले में पहले ही यह निर्देश दे चुका है कि मृत व्यक्तियों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जानी चाहिए. जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है.

अंतिम संस्कार के लिए अस्पताल से मिलती है राशि

मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल कोष से लावारिस शव के अंतिम संस्कार के लिए 3000 रुपये मगध मेडिकल थाने के कर्मी को दिये जाते हैं. शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि को बढ़ाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. विभाग से निर्देश मिलने के बाद ही इसमें किसी तरह का बदलाव संभव हो सकेगा.

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By PRANJAL PANDEY

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