गया जी से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट
Gaya ji News: गया जी जिले के फतेहपुर प्रखंड के मंझगांवा गांव में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. जहरीले सांप के डसने से 24 वर्षीय प्रियंका कुमारी की मौत हो गई. प्रियंका अपने पीछे एक मासूम बेटा और बेटी छोड़ गई हैं. मां की असमय मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया है, जबकि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
घरेलू काम के दौरान सांप ने डसा
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार की शाम प्रियंका कुमारी किसी घरेलू कार्य से घर से बाहर निकली थीं. इसी दौरान उन्हें एक जहरीले सांप ने डस लिया. शुरुआत में परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि स्थिति संभल जाएगी, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह जानलेवा साबित हो गया.
अस्पताल नहीं,पहले ओझा के पास ले गए परिजन
सर्पदंश के तुरंत बाद प्रियंका को अस्पताल पहुंचाने के बजाय परिजन उन्हें झाड़-फूंक कराने के लिए एक स्थानीय तांत्रिक के पास ले गए. करीब एक घंटे तक झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा. इस दौरान शरीर में जहर लगातार फैलता गया और प्रियंका की हालत तेजी से बिगड़ने लगी.
एक घंटे की देरी बनी मौत की वजह
जब प्रियंका की स्थिति गंभीर हो गई तब परिजन उन्हें फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए तत्काल मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गया रेफर कर दिया. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही महेर के पास रास्ते में उनकी मौत हो गई.
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
प्रियंका की मौत के बाद उनके दोनों छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के लोग सदमे में हैं. गांव के लोगों का कहना है कि प्रियंका बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव की महिला थीं. उनकी अचानक मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.
मायके और ससुराल दोनों गांवों में शोक की लहर
मृतका का मायका रघवाचक गांव में है. जबकि ससुराल मंझगांवा में है. घटना की खबर मिलते ही दोनों गांवों में शोक की लहर दौड़ गई. रिश्तेदार और ग्रामीण परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं. हर कोई इस दर्दनाक घटना को लेकर दुख व्यक्त कर रहा है.
सर्पदंश में झाड़-फूंक नहीं, तुरंत कराएं इलाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप काटने के बाद हर मिनट कीमती होता है. ऐसे मामलों में झाड़-फूंक और अंधविश्वास पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है. समय रहते अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम का उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है. यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अंधविश्वास और इलाज में देरी कितनी खतरनाक हो सकती है. यदि प्रियंका को सांप काटने के तुरंत बाद अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद आज वह अपने परिवार और बच्चों के बीच होतीं.
