Kala Azar in Gaya Ji : गया जी जिला के टनकुप्पा प्रखंड के बुद्धगिंजोय गांव में कालाजार ( Visceral Leishmaniasis ) के मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग की ओर से गांव में संक्रमण की संभावना को देखते हुए कीटनाशक छिड़काव किया गया है.
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एमई हक ने बताया कि गांव के एक व्यक्ति में कालाजार के लक्षण प्रकट होने के बाद पटना में इलाज किया गया है. व्यक्ति रोटी-रोजगार के सिलसिले में बाहर कई शहरों में रह रहा था.
घर आने के बाद उसमें कालाजार के लक्षण दिखे. पटना में जांच के बाद कालाजार की पुष्टि हुई है. गांव में कालाजार फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वेक्टर सैंड फ्लाइ या बालू मक्खी भी मिला है. इसे देखते हुए विभाग की ओर से गांव के लगभग 150 घरों, स्कूल तथा सार्वजनिक भवन आदि में सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड से फोकल स्प्रे किया गया है.
उन्होंने बताया कि सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड फोकल स्प्रे दीवारों पर छह फीट की ऊंचाई तक ही किया जाता है. बालू मक्खी छह फीट की ऊंचाई से अधिक नहीं जा सकती है. आशा स्वास्थ्यकर्मियों को गांव में अन्य कालाजार के मामलों की खोज करने के लिए कहा गया है. वैसे मरीज जिन्हें 15 दिन से अधिक समय से बुखार है, उनकी कालाजार जांच आवश्यक है.
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कालाजार के लक्षण और बीमारी का खतरनाक प्रभाव
खतरनाक है कालाजार का बुखार. कालाजार को ब्लैक फीवर के नाम से भी जाना जाता है. यह लिश्मैनिया डोनोवानी नामक बैक्टीरिया से फैलता है. सैंड फ्लाइ या बालू मक्खी के काटने से होता है. बालू मक्खी के काटने से बुखार आना शुरू होता है.
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काटे हुए स्थान पर जख्म भी बन सकता है. कालाजार रोगी धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. इस बीमारी से मरीज का लीवर और आंत में सूजन हो जाता है.
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पेट फूलने लगता है के साथ भूख नहीं लगना व खून की कमी हो जाती है. वजन तेजी से गिरने, त्वचा पतला और काला होने लगता है. समय पर इलाज नहीं होने से मरीज की मौत हो सकती है. ग्रामीणों को घरों की दरारों को मिट्टी या सीमेंट से बंद कर देने, कमरों में पर्याप्त रोशनी व हवा आने की व्यवस्था करने, मवेशियों के रहने वाली जगहों की नियमित सफाई रखने आदि की सलाह दी गई है.
पहले भी मिल चुके हैं जिले में कालाजार के मामले
पहले भी मिले हैं कालाजार रोगी. 2025 में भी खिजरसराय में एक मामला सामने आया था. हालांकि संक्रमित महिला किसी अन्य जगह पर रहती थी और कालाजार से संक्रमित होने के बाद अपने घर आई थी. बुखार रहने पर जांच में कालाजार की पुष्टि हुई थी. इसके बाद पटना में उसका इलाज किया गया था.
