गया जी : चेन्नई ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले गौतम का शव पहुंचा गांव, गर्भवती पत्नी और मां के विलाप से रो पड़ा पूरा इलाका

Chennai Train Accident Gautam Manjhi : चेन्नई में ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले गया के युवक गौतम मांझी का शव पैतृक गांव पहुंचा. शव के गांव पहुंचते ही परिजनों में मातम छा गया. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के विशेष प्रयासों से शव को गांव तक पहुंचाया गया.

Chennai Train Accident Gautam Manjhi : बिहार के गया जिले के शेरघाटी प्रखंड अंतर्गत भटकुरहा गांव में उस वक्त मातम पसर गया, जब चेन्नई में एक ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले युवक गौतम मांझी का शव एंबुलेंस से उनके पैतृक गांव पहुंचा. शव के गांव पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गमगीन हो गया. मृतक की मां और गर्भवती पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के विशेष प्रयास से मृतक का शव चेन्नई से गांव तक पहुंच पाया है.

चेन्नई में ट्रेन की चपेट में आने से हुई थी मौत

मृतक गौतम मांझी दो भाइयों में बड़ा था. उसके पिता रितेश मांझी गांव में ही मजदूरी करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ही गौतम करीब दो महीने पहले रोजगार की तलाश में चेन्नई गया था. वह बीते 22 जुलाई 2026 को अपने घर लौटने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचा था. इसी दौरान ट्रेन में चढ़ने के क्रम में वह दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई.

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के प्रयास से आया शव

परिजनों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय होने के कारण माता-पिता चेन्नई से शव लाने में पूरी तरह असमर्थ थे. इस दुखद परिस्थिति में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के शेरघाटी प्रखंड अध्यक्ष मनोज मांझी ने आगे आकर पहल की. उनके विशेष प्रयासों और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के सहयोग से मृतक गौतम मांझी के शव को एंबुलेंस के माध्यम से चेन्नई से सीधे शेरघाटी के भटकुरहा गांव तक पहुंचाया गया.

पिछले साल ही हुई थी गौतम की शादी

ग्रामीणों और मुखिया सुधीर मांझी तथा अर्जुन मांझी ने बताया कि गौतम की शादी महज पिछले वर्ष ही हुई थी. उसकी पत्नी रिंकी देवी वर्तमान में गर्भवती है. पूरा परिवार घर में आने वाले नए मेहमान की उम्मीद में खुशियां मना रहा था, लेकिन इस आकस्मिक हादसे ने पल भर में सब कुछ उजाड़ दिया. इस अनहोनी से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

पलायन की समस्या और स्थानीय रोजगार का अभाव

ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके इलाके में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं. यही वजह है कि भटकुरहा गांव के लगभग 50 से 60 युवक रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाकर बड़ी कंपनियों, फैक्ट्रियों, प्लांट और अन्य संस्थानों में मजदूरी करने को विवश हैं. गौतम की इस दर्दनाक मौत ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अभाव और पलायन की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है. अंततः पैतृक गांव में गमगीन माहौल के बीच मृतक का अंतिम संस्कार किया गया.

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By Prabhat khabar news desk

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