नागरिकों को प्रदत्त अधिकारों की जानकारी सभी को होनी चाहिए

स्थापना दिवस को पखवारे के रूप में मना रहा सीयूएसबी

स्थापना दिवस को पखवारे के रूप में मना रहा सीयूएसबी

सीयूएसबी में स्थापना दिवस व्याख्यान

संवैधानिकता और परिवर्तनशील न्याय, अपनी जड़ों का सम्मान, अपने भविष्य का निर्माण विषय पर रखे विचार

वरीय संवाददाता, गया जी. दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) अपने स्थापना दिवस को पखवारे के रूप में मना रहा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किये जा रहे हैं. इसी व्याख्यान शृंखला के अंतर्गत सीयूएसबी के विधि एवं शासन विभाग की ओर से संवैधानिकता और परिवर्तनशील न्याय, अपनी जड़ों का सम्मान, अपने भविष्य का निर्माण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पंजाब के कुलपति प्रो जय शंकर सिंह ने भारतीय संविधान के महत्व तथा देशवासियों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में उसके विविध उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए व्याख्यान दिया. उन्होंने भारतीय संविधान की गतिशील प्रकृति पर बल देते हुए कहा कि संगोष्ठी में होने वाली चर्चाएं विद्यार्थियों को संविधान के मूल्यों और संवैधानिकता की भावना के प्रति संवेदनशील बनायेंगी. अपने संबोधन के दौरान प्रो सिंह ने भारतीय संविधान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण भी साझा किये, जो दैनिक जीवन में लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं. उन्होंने आम नागरिकों को प्रदत्त अधिकारों की जानकारी के महत्व पर भी बल दिया, जिससे न्याय की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित एवं सुनिश्चित की जा सकती है. सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने उपस्थित सभी लोगों से भारत के संविधान का पालन करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान आदर्श नागरिकों, वकीलों, पेशेवरों आदि के निर्माण के मिशन के साथ समाज में एक मानक स्थापित करते हैं. विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी में प्रो सिंह ने विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों से विश्वविद्यालय एवं समाज के प्रति अपने समर्पण और योगदान पर आत्ममंथन (अंतर्दृष्टि), अतीतावलोकन (पुनरावलोकन) और भविष्य की योजना (दूरदृष्टि) करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा समाजोन्मुखी होनी चाहिए और देश के जिम्मेदार व आदर्श नागरिक के निर्माण पर बल देना चाहिए.

अध्यापक व विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को बनाया सफल

पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम के समन्वयक प्रो प्रदीप कुमार दास थे, जबकि डॉ पूनम कुमारी सह-समन्वयक थी. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत विधि एवं शासन संकाय के विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो अशोक कुमार के स्वागत भाषण से हुई जिसमें उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य को साझा किया. कार्यक्रम का समापन सहायक प्राध्यापक डॉ चंदना सुबा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. कार्यक्रम का संचालन विधि विभाग के छात्र आदित्य सिन्हा ने किया. इस संगोष्ठी में संकाय सदस्य प्रो पवन कुमार मिश्रा, प्रो एसपी श्रीवास्तव, डॉ सुरेन्द्र कुमार, मणि प्रताप, डॉ कुमारी नीतू, डॉ पल्लवी सिंह, डॉ अनंत प्रकाश नारायण, डॉ देव नारायण सिंह, डॉ निहारिका सिंह एवं डॉ पारिजात प्रधान की उपस्थिति रही. साथ ही, विद्यार्थियों की टीम में शामिल नेहा बर्मा, अंजलि कुमारी, अन्नपूर्णा, राजीव राज, अभिषेक आनंद, संतोष कुमार आदि अनेक विद्यार्थियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया.

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