गया जी में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, मगध मेडिकल हॉस्पिटल में 100 बेड का स्पेशल वार्ड तैयार

Gaya Ji Dengue Alert : गया जी के मगध मेडिकल अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 100 बेड का स्पेशल वार्ड बनाया गया है. अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स भी उपलब्ध हैं.

Gaya Ji Dengue Alert : गया जी में जुलाई से सितंबर तक लोगों के बीच डेंगू का खतरा लगातार बना रहता है. पूर्व के वर्षों में भी इस मौसम के दौरान ही शहर के कई अलग-अलग मोहल्लों में डेंगू की बीमारी लोगों के बीच काफी फैली थी. अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो वर्ष 2025 में जिले में डेंगू के कुल 34 मामले दर्ज किए गए थे. इस लिहाज से देखा जाए, तो पिछली बार इस रोग का प्रसार काफी हद तक बहुत कम हो गया था, जिससे स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य प्रशासन को थोड़ी राहत मिली थी.

इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बार इससे पूरी मजबूती से निपटने की तैयारी समय रहते पूरी कर ली गई है. मगध मेडिकल अस्पताल में इसके मरीजों के लिए पहले से ही एक स्पेशल वार्ड का निर्माण कराया गया है. यहां कुल 100 बेड डेंगू मरीजों के इलाज के लिए विशेष रूप से आरक्षित रखे गए हैं.

प्लेटलेट्स उपलब्ध, रेफर करने की जरूरत नहीं

वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि इस गंभीर बीमारी में लोगों के शरीर का प्लेटलेट्स काफी तेजी से कम हो जाता है. मगध मेडिकल अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स उपलब्ध रहने के चलते मरीज को बहुत ही विषम परिस्थिति में ही यहां से कहीं और रेफर करने की जरूरत पड़ती है. पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए, तो परिजनों के व्यक्तिगत मांग पर ही मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया है.

इसके अलावा, जिले के सभी अनुमंडलीय व प्राथमिक अस्पतालों में भी इलाज की बेहतर व्यवस्था की गई है. जांच के लिए गया सदर अस्पताल व मगध मेडिकल में विशेष प्रबंध हैं, जहां बुखार या डेंगू के लक्षण दिखते ही तुरंत मुफ्त जांच की जाती है.

'जांच करें, सफाई करें और ढकें' है थीम

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष ज्यादातर बाहर से आए लोगों की जांच में ही डेंगू रोग से पीड़ित होने की बात सामने आई थी. फिलहाल जुलाई माह को पूरे जिले में एंटी-डेंगू माह के रूप में मनाया जा रहा है. इस बार एंटी डेंगू माह की मुख्य थीम "जांच करें, सफाई करें और ढकें" निर्धारित की गई है.

डेंगू व चिकनगुनिया की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में काम कर रहा है. सिविल सर्जन राजाराम प्रसाद ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड, विशेष जांच किट, मच्छरदानी, आवश्यक दवाइयां व प्लेटलेट्स की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित रखनी है.

संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है रोग

विभागीय जानकारी के अनुसार, डेंगू संक्रमित मादा मच्छरों, मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से मनुष्यों में तेजी से फैलता है. तेज बुखार आना, आंखों के ठीक पीछे के हिस्से तथा शरीर में तेज दर्द होना और जोड़ों में असहनीय दर्द होना इसके प्रमुख लक्षण हैं. जब कोई मच्छर डेंगू वायरस से संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो वह वायरस को अपने शरीर में ले लेता है.

फिर वही संक्रमित मच्छर जब किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वह वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है. बचाव के लिए शहरी इलाकों में नगर निकाय की ओर से नियमित फॉगिंग व कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि देहाती क्षेत्रों में इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की टीम संभाल रही है.

इन क्षेत्रों में सबसे अधिक रहता है डेंगू का प्रकोप

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एम. ई. हक ने बताया कि लोग अगर खुद सावधान व सतर्क रहेंगे, तो डेंगू के प्रकोप को फैलने से पूरी तरह रोका जा सकता है. गया शहरी क्षेत्र में पुलिस लाइन एरिया व अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से सबसे अधिक डेंगू के मामले सामने आते हैं, जबकि प्रखंडों में बोधगया तथा फतेहपुर आदि क्षेत्रों से डेंगू के अधिक मामले मिलते हैं.

इससे बचने के लिए घरों के आसपास खुले टैंकों, ड्रम, टायर, गमला, कूलर और खुले बर्तनों में पानी जमा न होने दें क्योंकि इन्हीं में डेंगू के मच्छर पनपते हैं. दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े जरूर पहनें.

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