गया जी : डीडीयू रेल मंडल का नया कीर्तिमान: 24 घंटे में 439 मालगाड़ियों का इंटरचेंज, दो दिन पुराना रिकॉर्ड टूटा.

Gaya Ji News : पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) रेल मंडल ने मालगाड़ियों के परिचालन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. 18 जुलाई को 24 घंटे में 439 मालगाड़ियों का इंटरचेंज कर यह उपलब्धि हासिल की गई है। इस रिकॉर्ड से माल ढुलाई की गति बढ़ेगी.

Gaya Ji News : पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) रेल मंडल ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मालगाड़ियों के परिचालन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.

मंडल ने 18 जुलाई को महज 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड 439 मालगाड़ियों का इंटरचेंज कर इस वित्तीय वर्ष का अब तक का सर्वोच्च प्रदर्शन दर्ज किया है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) उदय सिंह मीना के कुशल मार्गदर्शन में हासिल हुई है.

क्या होता है ट्रेनों का 'इंटरचेंज'?

रेलवे प्रशासन के अनुसार, इंटरचेंज का सीधा अर्थ एक रेल मंडल से दूसरे रेल मंडल अथवा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के बीच मालगाड़ियों का सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध हस्तांतरण (आदान-प्रदान) करना है.

18 जुलाई को डीडीयू मंडल ने विभिन्न दिशाओं से कुल 217 मालगाड़ियां 'टेकन ओवर' (प्राप्त) कीं, जबकि अपने मंडल से 222 मालगाड़ियां 'मेड ओवर' (आगे के लिए रवाना) कीं. इनमें विशेष रूप से प्रयागराज दिशा की ओर उत्तर मध्य रेलवे और डीएफसी को संयुक्त रूप से 85 मालगाड़ियों का मेड ओवर किया गया, जो इस चालू वित्तीय वर्ष का सबसे सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा है.

दो दिन पहले बने रिकॉर्ड को ही छोड़ा पीछे

गौरतलब है कि इससे पहले बीते 16 जुलाई को ही 422 मालगाड़ियों के इंटरचेंज का एक बड़ा रिकॉर्ड बना था, जिसे महज दो दिनों के भीतर ही डीडीयू मंडल ने ध्वस्त करते हुए पीछे छोड़ दिया.

18 जुलाई के ही दिन मंडल ने कुल 694 यात्री व मालगाड़ियों का बेहद सुरक्षित संचालन भी सुनिश्चित किया. इनमें 439 मालगाड़ियां और 255 कोचिंग (यात्री) ट्रेनें शामिल थीं. इतने व्यस्त परिचालन और भारी दबाव के बावजूद, मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों की 94.19 प्रतिशत समयपालनता (पंक्चुअलिटी) बनाए रखना मंडल की उत्कृष्ट परिचालन क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है.

भारतीय रेल के सबसे व्यस्त मंडलों में से एक

डीडीयू मंडल भारतीय रेल के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेल मंडलों में शुमार है. यहां से हर रोज दानापुर, धनबाद, लखनऊ, प्रयागराज मंडलों तथा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ बहुत बड़े पैमाने पर मालगाड़ियों का इंटरचेंज किया जाता है.

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इंटरचेंज की गति में वृद्धि होने से मालगाड़ियों का अनावश्यक ठहराव (यार्ड डिटेंशन) काफी कम होता है. इससे देश के विभिन्न हिस्सों में कोयला, उर्वरक, सीमेंट, खाद्यान्न तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से संभव हो पाता है. रेलवे प्रबंधन ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय परिचालन (ऑपरेटिंग) विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय और मजबूत टीमवर्क को दिया है.

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