आपसी रंजिश के कारण हुई हत्या के एक मामले में अदालत ने शुक्रवार को दोषी अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. साथ ही साथ तीस हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश 15 राजेश मोहन की अदालत ने दोषी अभियुक्त जितेन्द्र राज को यह सजा सुनायी.
अभियोजन पक्ष और प्राथमिकी का विवरण
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेंद्र कुमार ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि इस मामले में मृतक के चाचा ने प्राथमिकी दर्ज करवायी थी.
अपने प्राथमिकी में उन्होंने कहा था कि 26 जनवरी 2003 को जब मैं और मेरा भतीजा नवीन कुमार (मृतक) बाजार से लौट रहे थे, तो रास्ते में अभियुक्त जितेंद्र राज व अन्य कुछ लोग खड़ा था. मेरा भतीजा अभियुक्त के स्कूल में शिक्षक का काम करता था.
गोली चलने की आवाज और भागते हुए आरोपी
जैसे ही मैं आगे बढ़ा पीछे गोली चलने की आवाज सुनायी दी. मुड़कर देखा तो अभियुक्त व उसके साथ रहे लोग को भागते हुए देखा.
गवाही और टिकारी थाना कांड से संबंधित मामला
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 14 लोगों की गवाही हुई. सूचक की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार ने अपना पक्ष रखा. यह मामला टिकारी थाना कांड संख्या 10/2003 से संबंधित है.
