बोधगया में तिब्बती समुदाय का कैंडल मार्च, चीन की नीतियों के खिलाफ उठाई आवाज

Bodh Gaya News : बोधगया में तिब्बती समुदाय और बौद्ध लामाओं ने विश्व शांति और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कैंडल मार्च और प्रार्थना सभा का आयोजन किया. इस मार्च के ज़रिए उन्होंने चीन की नीतियों का विरोध जताया और तिब्बत की स्वतंत्रता की अपील की.

Bodh Gaya News : विश्व शांति, मानवाधिकारों की रक्षा व तिब्बती समुदाय के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के उद्देश्य से शनिवार की शाम को बोधगया में बौद्ध लामाओं व तिब्बती समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्ण कैंडल मार्च व प्रार्थना सभा का आयोजन किया. तिब्बत मंदिर से निकाली गई इस शांति रैली में विभिन्न देशों के बौद्ध मठों के भिक्षु, मठ प्रभारी एवं तिब्बती समुदाय के लोगों के साथ इंटरनेशनल बुद्धिस्ट काउंसिल (आइबीसी) के प्रेसिडेंट लामा नवांग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.

इस अवसर पर संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि दो जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (यूएनओ) के सामने तिब्बती कार्यकर्ता लोग्हा रंगजेन ने आत्मदाह कर अपनी जान दे दी.

चीनी नीतियों का मुखर विरोध

वक्ताओं ने उन्हें तिब्बत में शांति, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए उनके योगदान को याद किया. आइबीसी के प्रेसिडेंट का कहना था कि तिब्बती समुदाय सहित विभिन्न जातीय समूहों को प्रभावित करने वाले नए चीनी कानूनों के विरोध में लोग्हा रंगजेन लंबे समय से आवाज उठाते रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के माध्यम से तिब्बती भाषा, संस्कृति, धर्म और पारंपरिक पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इसी विरोध के प्रतीक स्वरूप उन्होंने आत्मदाह जैसा कदम उठाया. बौद्ध लामाओं ने दिवंगत लोग्हा रंगजेन की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की तथा विश्व में शांति, अहिंसा और सभी लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा की कामना की.

विश्व समुदाय से आगे आने की अपील

इस दौरान लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शांतिपूर्ण तरीके से अपना समर्थन व्यक्त किया. मार्च के समापन पर तिब्बत बौद्ध मठ के प्रभारी लामा आमजे ने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने विश्व समुदाय से संवाद, करुणा और शांतिपूर्ण उपायों के माध्यम से मानवता एवं विश्व शांति की दिशा में प्रयास तेज करने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि चीन की सरकार तिब्बत की संस्कृति को बर्बाद करने पर तुली है, जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए. उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि तिब्बत की आजादी, वर्तमान हालात और वहां की समस्याओं के समाधान के लिए वे आगे आएं.

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