बाल श्रम कराने पर 50 हजार तक जुर्माना व दो वर्ष तक की होगी सजा; गया जी में अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी

गया जी जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) में श्रम अधिकार दिवस सह ग्रामीण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इस शिविर में श्रमिकों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और बाल श्रम व बंधुआ मजदूरी के खिलाफ सख्त कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई.

गया जी जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) के सभागार में शनिवार को श्रम विभाग की ओर से एक दिवसीय श्रम अधिकार दिवस सह ग्रामीण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ "श्रमेव जयते" के उद्घोष के साथ हुआ. शिविर में उप श्रमायुक्त पुनम कुमारी, सहायक श्रमायुक्त ऋतुराज, श्रम विभाग के पदाधिकारी, डीआरसीसी के मैनेजर सत्येंद्र कुमार, श्रमिक संगठन, विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधि तथा जिले के विभिन्न पंचायतों से आये श्रमिकों ने भाग लिया.

प्रशिक्षण के दौरान श्रमिकों को श्रम अधिकार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, रोजगार के अवसरों व सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गयी. उप श्रमायुक्त ने बाल श्रम या श्रम विभाग से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना तुरंत विभाग को दें. उन्होंने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की, श्रमिक रंजीत कुमार को 10 हजार रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया. साथ ही मिथलेश यादव, अनिल चौधरी एवं शांति देवी को विवाह सहायता योजना के तहत 50-50 हजार रुपये के डमी चेक वितरित किए. समग्र सेवा संस्था, वजीरगंज के रमेश कुमार को भी उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया. शिविर में आये श्रमिकों को एक दिन की मजदूरी, यात्रा भत्ता तथा भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध करायी गयी.

बाल श्रम पर 50 हजार तक जुर्माना व दो वर्ष तक की सजा

नीमचक बथानी के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी कर्पूर बावला ने कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है. दोषी नियोजकों पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा छह माह से दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है. उन्होंने बताया कि मुक्त कराये गये बाल श्रमिकों को तत्काल तीन हजार रुपये की सहायता तथा पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये प्रदान किये जाते हैं.

बंधुआ मजदूरों को एक लाख रूपये की पुनर्वास राशि

परैया के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुजीत कुमार ने कहा कि मुक्त कराये गये बंधुआ मजदूरों को तत्काल 30 हजार रुपये की सहायता तथा सत्यापन के बाद एक लाख रुपये की पुनर्वास राशि दी जाती है.

मानपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि बिहार सरकार प्रत्येक वर्ष अप्रैल व अक्टूबर माह में न्यूनतम मजदूरी की नयी दरें जारी करती है. वहीं वजीरगंज के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अंकित राज ने बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि पंजीकृत निर्माण श्रमिक की सामान्य मृत्यु पर दो लाख रुपये तथा कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है.


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Author: Haribansh kumar

Published by: Anjani Pandey

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