बिरसा मुंडा आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और जन-प्रतिरोध के प्रतीक : कुलसचिव

सीयूएसबी में 26 नवंबर तक आदिवासी विषयक निबंध लेखन व पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का होगा आयोजन

बोधगया.

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर सीयूएसबी के बिरसा मुंडा आदिवासी अध्ययन केंद्र द्वारा विशेष समारोह का आयोजन किया गया. भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, जननायक व आदिवासी संस्कृति व अस्मिता के प्रतीक धरती आबा बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में प्रशासनिक भवन में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा, प्रो पवन कुमार मिश्रा (डीएसडब्ल्यू), प्रो प्रणव कुमार (प्रॉक्टर), प्रो किरण कुमारी, प्रो उषा तिवारी, डॉ रिकिल चेरमांग, डॉ मंगलेश कुमार मंगलम, डॉ आतिश दास, आर एल उदृष्ण देवरी के साथ विभिन्न विभागों के शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए बिरसा मुंडा आदिवासी अध्ययन केंद्र के समन्वयक डॉ अनुज लुगुन ने स्वाधीनता आंदोलन में बिरसा मुंडा और आदिवासी आंदोलन के योगदान को रेखांकित किया. साथ ही, उन्होंने जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर निर्देशित आगामी आयोजनों की सूचना साझा की. कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा द्वारा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण व उद्बोधन से हुई. इसके बाद विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, शिक्षकों, छात्रों ने धरती आबा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की. प्रो राणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि बिरसा मुंडा सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और जन-प्रतिरोध के प्रतीक हैं. उनकी 150वीं जयंती पर हम न केवल उनके बलिदान को याद करते हैं, बल्कि उनकी विचारधारा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी लेते हैं. हमें धरती आबा के नारे अबुआ दिसुम, अबुआ राज को नहीं भूलना चाहिए. कार्यक्रम अंत में डॉ अनुज लुगुन ने कार्यक्रम में सम्मिलित सभी सम्मानित जनों को धन्यवाद दिया. साथ ही यह घोषणा की कि जनजातीय गौरव दिवस के इस अवसर पर बिरसा मुंडा आदिवासी अध्ययन केंद्र द्वारा 15 से 26 नवंबर के बीच छात्रों के लिए आदिवासी विषयक निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण आदि प्रतियोगिता आयोजित करने की योजना है ताकि छात्रों में आदिवासी समाज, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की सम्यक समझ विकसित की जा सके.

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Published by: Kalendra pratap singh

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