Bihar Mahotsav Bengaluru : बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय आश्रम में आयोजित बिहार महोत्सव का उद्घाटन बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने किया. इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और मंत्री जमा खान भी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार की गौरवशाली विरासत, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों की भूमि है.
ऐतिहासिक और ज्ञान परंपरा की भूमि
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पाटलिपुत्र, सम्राट अशोक, भगवान बुद्ध और भगवान महावीर से जुड़ी विरासत बिहार को विशिष्ट पहचान देती है. नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालय विश्वभर में ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे हैं.
आर्यभट्ट की वैज्ञानिक दृष्टि और चाणक्य की कूटनीति एवं अर्थशास्त्र आज भी प्रेरणास्रोत हैं. वैशाली को लोकतंत्र की प्राचीन भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि बिहार को लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ों से जुड़ा होने का गौरव प्राप्त है.
सांस्कृतिक विविधता और लोक पर्व
डॉ प्रेम कुमार ने मधुबनी पेंटिंग, मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका भाषाओं को बिहार की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बताया. छठ महापर्व को प्रकृति, स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक समानता का संदेश देने वाला पर्व बताया.
"बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों की भूमि है. गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर युवा शक्ति विकसित और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी." — डॉ प्रेम कुमार, विधानसभा अध्यक्ष
जीवंत लोक कला और साहित्य
उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की लोकनाट्य परंपरा, विद्यापति की रचनाएं तथा सोहर, कजरी और चैता जैसे लोकगीत बिहार की संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं.
विकसित बिहार के निर्माण में युवाओं की भूमिका
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार के गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर युवा शक्ति विकसित और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
