Bihar Train News: किऊल-गया रेल लाइन डबलिंग से बदली तस्वीर, यात्रा समय 40% घटा

Bihar Train News: किऊल-गया रेल खंड के दोहरीकरण के बाद इस रूट पर रेल यातायात पूरी तरह बदल गया है. ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने से यात्रा का समय कम हुआ है और माल ढुलाई अधिक आसान बनी है.

Bihar Train News: किऊल-गया रेल खंड के दोहरीकरण के बाद इस रूट पर यातायात और माल ढुलाई की तस्वीर पूरी तरह बदल गयी है. 125 किलोमीटर लंबे इस खंड के दोहरीकरण से न केवल यात्रियों को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद रेल सेवा मिली है, बल्कि पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच माल परिवहन भी कहीं अधिक आसान हो गया है.

ट्रेन की बढ़ी स्पीड

दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा तक बढ़ा दी गयी है. इससे पहले जहां किऊल से गया की यात्रा में करीब छह घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी लगभग साढ़े तीन घंटे में पूरी हो रही है. यानी यात्रियों को 40 प्रतिशत से अधिक समय की बचत हो रही है. सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि सिंगल लाइन के कारण होने वाली 20 से 40 मिनट की क्रॉसिंग देरी पूरी तरह समाप्त हो गयी है, जिससे ट्रेनों की समय पालन क्षमता में बड़ा सुधार आया है.

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सुविधाएं हुई बेहतर

परियोजना के तहत 31 बड़े पुलों और 300 से अधिक छोटे पुलों का निर्माण किया गया है. इसके साथ ही 10 स्टेशनों पर यार्ड री-मॉडलिंग, 100 एलेक्रिफिकेशन और लेटेस्ट सिग्नलिंग सिस्टम लागू की गयी है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, नए फुट ओवर ब्रिज और उन्नत यात्री सुविधाओं से सुरक्षा स्तर भी बेहतर हुआ है.

किऊल-गया रेल खंड का दोहरीकरण चार जिलों लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और गया के लाखों लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है. रोजाना यात्रा करने वाले छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और छोटे व्यवसायी अब अधिक भरोसेमंद रेल सेवा का लाभ उठा रहे हैं. इस परियोजना से न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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