राष्ट्र वो है, जहां सामूहिकता हो : कुलपति

सीयूएसबी में राष्ट्रीय सेवा योजना के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में कुलपति ने किया संबोधित

सीयूएसबी में राष्ट्रीय सेवा योजना के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में कुलपति ने किया संबोधित

वरीय संवाददाता, बोधगया.

सीयूएसबी के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइ ने नये वालंटियर (स्वयंसेवकों) के लिए विवेकानंद लेक्चर थिएटर में ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य एनएसएस के नये स्वयंसेवकों को इकाई के उद्देश्य व गतिविधियों से रूबरू करना था. मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने व्याख्यान में भारतीय संदर्भ में राष्ट्र और सेवा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राष्ट्र वो है, जहां सामूहिकता हो, जिसके सामूहिक उत्थान में यश का भाव हो और उसके पतन में दुख हो. कुलपति ने कहा कि सेवा से तात्पर्य ऐसा भाव जो निस्वार्थ हो. उन्होंने अपने विचार को समझाने के लिए एक गीत का संदर्भ दिया. दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है, जब लोगों का दुख देखा, तो अपना सुख मैं भूल गया. अर्थात जब स्वार्थ की जगह दूसरों के सुख की कामना का भाव हो, वही एनएसएस में शामिल होने योग्य है. कुलपति प्रो सिंह ने बताया कि राष्ट्र सेवा का हक मात्र उन्हीं को है, जो समानता व समाज सुधार की बात करते हो और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हो, वही लोग एनएसएस में शामिल होने योग्य है.

समानुभूति, त्याग, प्रकृति प्रेम से परिचित कराता है एनएसएस

पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस अवसर पर एनएसएस की संयोजक प्रो ऊषा तिवारी ने अपने स्वागत भाषण में एनएसएस के महत्व पर प्रकाश डाला. बताया कि यह मात्र कोई इकाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक निर्माण का स्तंभ है, जो राष्ट्र को प्राथमिकता देना, समानुभूति, त्याग, प्रकृति प्रेम और प्राकृतिक अभिविन्यास से परिचित कराता है. एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी व कार्यक्रम के संयोजक डॉ अनिल कुमार ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय सेवा योजना की उत्पत्ति व विस्तृत इतिहास पर प्रकाश डाला. उन्होंने कोठारी आयोग 1964 के उस सिफारिश को भी चिह्नित किया, जिसमें एनएसएस को समस्त विश्वविद्यालय में स्थापित करने की वकालत की गयी व जिसका समर्थन कुलपति कांफ्रेंस 1969 ने किया और उसके पश्चात राष्ट्रीय सेवा योजना को संपूर्ण भारत में लागू किया गया. उन्होंने वॉलेंटियर को वर्ष में 120 घंटे के कार्य योगदान के नियम को समझाते हुए कहा कि एक अच्छे स्वयंसेवकों को समय के घंटे नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य व समाज में अपने योगदान में कितने सफल हुए, उस पर ध्यान देना चाहिए. धन्यवाद ज्ञापन एनएसए की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ रिंकी ने किया. मंच संचालन सुहानी ने किया. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में यशस्विनी मुंजनी, आचीराज, सुकन्या दास, प्राची, श्रेया रंजन, लवकुश कुमार, मेराजोत्थबल भीम, देवेश राणा, निशांत कुमार, शीशराम मीणा, नीतीश कुमार, संदीप, मनीष के अलावा एनएसएस स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रही.

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Published by: Kalendra pratap singh

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