बोधगया: विश्वशांति के लिए महाबोधि मंदिर परिसर में आयोजित काग्यू मोनलम चेन्मो के समाप्त होते ही बोधगया में सन्नाटा पसरने लगा है. महाबोधि मंदिर सहित अन्य मंदिरों, यहां तक कि सड़कों पर भी विदेशियों की संख्या काफी कम दिखने लगी है. बौद्ध तीर्थयात्रियों की कमी होने के कारण यहां के होटलों व रेस्टोरेंट भी खाली […]
बोधगया: विश्वशांति के लिए महाबोधि मंदिर परिसर में आयोजित काग्यू मोनलम चेन्मो के समाप्त होते ही बोधगया में सन्नाटा पसरने लगा है. महाबोधि मंदिर सहित अन्य मंदिरों, यहां तक कि सड़कों पर भी विदेशियों की संख्या काफी कम दिखने लगी है. बौद्ध तीर्थयात्रियों की कमी होने के कारण यहां के होटलों व रेस्टोरेंट भी खाली नजर आने लगे हैं.
यदा-कदा व छोटे ग्रुपवाले श्रद्धालुओं की टोली ही अब बोधगया में दिखायी दे रहे हैं. यात्रियों के कम होने से होटलों के कमरे भी खाली हैं, तो उनके भ्रमण को लेकर मौजूद छोटे-बड़े वाहन भी अब यात्रियों के बाट जोहने में जुटा है. होटल एसोसिएशन से जुड़े लोगों की मानें, तो बोधगया में मौजूद होटल व गेस्ट हाउसों में लगभग साढ़े तीन हजार कमरे हैं. इनमें से कमोबेश एक हजार के आसपास कमरे ही यात्रियों से भर पाते हैं. वह भी दो से चार दिन के लिए ही यात्रियों की गहमागहमी रहती है.
बौद्ध मठों में ठहर जाते हैं यात्री: होटल व्यावसायियों का कहना है कि बोधगया आनेवाले ज्यादातर बौद्ध यात्री यहां स्थित विभिन्न देशों के बौद्ध मठों में ही प्रवास करना मुनासिब समझने लगे हैं. यह भी कि यात्रियों को बौद्ध मठों में कमरों के साथ ही भोजन की व्यवस्था भी रहती है. वैसे यात्री जो खुद से खाना पकाना चाहते हैं, उन्हें इसकी इजाजत भी दे दी जाती है.
इस कारण बाजार क्षेत्र के अधिकतर रेस्टोरेंट का व्यवसाय चौपट होते जा रहा है. इधर, काग्यू मोनलम चेन्मो के बाद पूजा में शामिल होने आये बौद्ध लामा, अनी व अन्य श्रद्धालुओं की वापसी के कारण होटलों, रेस्टोरेंट व ट्रैवल्स व्यवसाय को अब मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है. हालांकि, आनेवाले दिनों में यहां निगमा मोनलम चेन्मो व 17वें ग्यालवा करमापा उज्ञेन त्रिनले दोरजे के नेतृत्व में आयोजित होने वाले काग्यू मोनलम चेन्मो को लेकर जुटनेवाली भीड़ पर भी लोगों की नजर है.