भारतीय अर्थव्यवस्था पर चिंतन की जरूरत

गया: भारतीय अर्थव्यवस्था पर चिंतन की जरूरत है. यहां की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने में युवा वर्ग अहम भूमिका अदा कर सकते हैं. जनकीकीय लाभांश को सही तरीके से भुना कर भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी सुदृढ़ बनाया जा सकता है. ये बातें गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में ‘डेमोग्राफी डिविडेंड’ विषय पर आयोजित सेमिनार का […]

गया: भारतीय अर्थव्यवस्था पर चिंतन की जरूरत है. यहां की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने में युवा वर्ग अहम भूमिका अदा कर सकते हैं. जनकीकीय लाभांश को सही तरीके से भुना कर भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी सुदृढ़ बनाया जा सकता है. ये बातें गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में ‘डेमोग्राफी डिविडेंड’ विषय पर आयोजित सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद मंगलवार को प्राचार्य डॉ शमसुल इसलाम ने कहीं.

डॉ इसलाम ने कहा कि बिहारी बच्चे बाहर में बिहारी कहलाना हीनता समझते हैं, जबकि भारत के विकास को रफ्तार पकड़ाने में बिहारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है. देश में पहले की तरह जमींदारी प्रथा नहीं है. आज शिक्षा पर किसी का एकाधिकार नहीं है. किसी भी वर्ग के लोग अपने हुनर व लगन के बल पर किसी भी मुकाम को हासिल सकते हैं. सिर्फ उन्हें उचित मार्गदर्शन की जरूरत होती है.

डॉ इसलाम ने कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष को निरंतर सेमिनार का आयोजन करने के लिए बधाई दी व अन्य विभागाध्यक्षों को इससे सीख लेने की बात कही. सेमिनार में मगध विश्वविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र के प्राध्यापक डॉ मो एहतेशाम खान ने कहा कि आबादी से भी देश को लाभांश की प्राप्ति होती है. जब देश में युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए सोचा जायेगा, तब ही जनसंख्या से लाभांश की कामना की जा सकती है.

इस मौके पर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ अश्विन कुमार, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ उमेश प्रसाद, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ दीपक कुमार, डॉ जीएन शर्मा, डॉ महेश्वरी प्रसाद यादव, डॉ रामविलास सिंह, डॉ अजीत कुमार व डॉ कुमारी प्रियंका मौजूद रहे.

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