पढ़ाई पर कम, जर्जर छत पर रहती है नजर

पढ़ाई पर कम, जर्जर छत पर रहती है नजरचांकद हाइस्कूल का पांच दशक पुराना भवन बदहालबरसात में टपकती है छत, झरने सा दिखता है माहौलप्रतिनिधि, बेलागंजनगर प्रखंड क्षेत्र के चाकंद हाइस्कूल का पांच दशक पुराना भवन बदहाल है. भवन की दीवारें व छत अत्यंत जर्जर हैं, जिससे छात्र-छात्राओं व शिक्षकों में दुर्घटना की आशंका बनी […]

पढ़ाई पर कम, जर्जर छत पर रहती है नजरचांकद हाइस्कूल का पांच दशक पुराना भवन बदहालबरसात में टपकती है छत, झरने सा दिखता है माहौलप्रतिनिधि, बेलागंजनगर प्रखंड क्षेत्र के चाकंद हाइस्कूल का पांच दशक पुराना भवन बदहाल है. भवन की दीवारें व छत अत्यंत जर्जर हैं, जिससे छात्र-छात्राओं व शिक्षकों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. क्लास के दौरान छात्र-छात्राओं का ध्यान शिक्षक की बातों से ज्यादा कमरे की जर्जर छत पर लगा रहता है. छत कभी भी गिर सकती है. बरसात में जर्जर छत के कारण पानी का रिसाव होने से कमरों व बरामदे में झरने सा माहौल उत्पन्न हो जाता है. पानी टपकने से शिक्षकों व बच्चों का सिर छिपाना भी मुश्किल हो जाता है. विद्यालय में छुट्टी करनी पड़ती है.पुराना भवन दो भाग में बना है. पहले भाग में दस, तो दूसरे में चार कमरे हैं. पहले भाग के एक कमरे में कार्यालय, दूसरे में प्रधानाध्यापक कक्ष, तीसरे में पुस्तकालय व दो कमरे शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए हैं. शेष पांच कमरों में क्लास लगता है. वहीं, दूसरे खंड के मात्र दो कमरों में ही शिक्षण कार्य होता है. दोनों भाग के सभी कमरों की हालात अत्यंत खस्ता है. प्रधानाधयापक मिथिलेश शर्मा ने बताया कि विद्यालय भवन की बदहाल स्थिति की जानकारी सभी विभागीय पदाधिकारियों, क्षेत्रीय विधायक सह प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को भी दी गयी है. सरकार द्वारा दी गयी राशि से पल्स टू का क्लास चलाने के लिए चार कमरे का बनवाये गये हैं. फिलहाल, प्लस टू की कक्षाओं का संचालन नहीं होने के कारण इन कमरों में अन्य कक्षाओं के बच्चों का पठन-पाठन हो रहा है.

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