जूनियर डॉक्टरों ने किया काम पर लौटने से इन्कार, सुविधा और सुरक्षा की मांग

गया : सुरक्षा के इंतजाम के बिना काम पर लौटने से जूनियर डॉक्टरों ने इन्कार कर दिया है. अस्पताल प्रशासन द्वारा जूनियर डॉक्टरों के काम पर लौटने के लिए बुधवार को दिन भर प्रयास किया जाता रहा. लेकिन, इस पर अड़े हुए हैं कि व्यवस्थाओं में पहले सुधार लाया जाये. इसके बाद ही काम पर […]

गया : सुरक्षा के इंतजाम के बिना काम पर लौटने से जूनियर डॉक्टरों ने इन्कार कर दिया है. अस्पताल प्रशासन द्वारा जूनियर डॉक्टरों के काम पर लौटने के लिए बुधवार को दिन भर प्रयास किया जाता रहा. लेकिन, इस पर अड़े हुए हैं कि व्यवस्थाओं में पहले सुधार लाया जाये. इसके बाद ही काम पर लौटेंगे. अस्पताल अधीक्षक डॉ विजय कृष्ण प्रसाद ने बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पुलिस अधिकारियों से बातचीत की गयी है. आश्वासन भी दिया गया है कि समुचित सुरक्षा व्यवस्था डॉक्टरों को दी जायेगी. उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद भी अस्पताल में मरीजों का इलाज सुचारु ढंग से किया जा रहा है.

गौरतलब है कि मंगलवार की रात को जूनियर डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम करना बंद कर दिया था. जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर मगध प्रमंडल आयुक्त से मिल कर बात रखी. जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया था कि सीनियर इमरजेंसी के साथ अन्य जगहों पर उपस्थित नहीं रहते हैं. इस स्थिति में उन्हें जो काम नहीं करना है, वह भी करना पड़ता है.
इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक इलाज भगवान भरोसे : जूनियर डॉक्टरों की बात सही है, तो इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे ही हो रहा है. ऐसे हर वक्त यह बात सामने आती रहती है कि मरीज के पहुंचने पर परिजन काे ही डॉक्टरों को खोजना पड़ता है. इतना ही नहीं कई बार इस चक्कर कर्मचारियों व मरीजों के परिजनों के साथ विवाद भी हुआ है. अस्पताल प्रशासन इस बात के प्रति लंबी-चौड़ी बातें जरूर करता रहा है.
लेकिन, सुधार लाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा सका है. इमरजेंसी की यूनिट नयी बिल्डिंग में जाने के बाद विवाद और उत्पन्न किया जा रहा है. कई तरह की सुविधाएं नहीं होने का हवाला देकर डॉक्टर ड्यूटी करने से परहेज कर रहे हैं. अस्पताल सूत्रों का कहना है कि पुरानी बिल्डिंग में इमरजेंसी यूनिट रहने के समय भी सीनियर डॉक्टरों के गायब रहने की शिकायत मिलती थी.
अस्पताल में कूड़ा जमा करने की जगह निश्चित नहीं
गया. अस्पताल में साफ-सफाई की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी को सौंप दी गयी है. लेकिन, अस्पताल परिसर से कचरा निकाल कर कहीं जमा करने के लिए एरिया नहीं निश्चित है. इतना ही नहीं मेडिकल वेस्टेज को भी अस्पताल परिसर के बगल में जमा कर दिया जाता है. यही करण है कि अस्पताल के बाहर कचरा वहां फेंका जाता है जहां से वार्डों की दूरी बहुत ही कम है. कचरा वाली जगह पर हर वक्त सूअर व अन्य जानवरों का जमावड़ा रहता है.

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