गया : कुख्यात आतंकी पठान तौसीफ व उसके सहयोगी सना खान को पकड़ कर पुलिस को सौंपने वाले युवक साइबर कैफे संचालक अनुराग बसु का रोजगार चौपट हो गया और वह गर्दिश की जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं. अनुराग ने बताया कि आतंकी को पकड़ने के बाद चलता हुआ रोजगार हाथ से निकल गया और अब रोजगार के लिए बाहर जाने की सोच रहे हैं.
13 सितंबर 2017 को आतंकी को पकड़ने से पहले राजेंद्र आश्रम मुहल्ले में साइबर कैफे चलाकर पूरे परिवार को आराम से चला रहे थे. सरकार की कई एजेंसियों के अधिकारियों ने उनके साइबर कैफे में पहुंच कर पड़ताल की और उन्होंने भरपूर सहयोग किया. अहमदाबाद बम ब्लास्ट कांड के आरोपित आतंकी तौसीफ के पकड़ने के बाद उसकी निशानदेही पर देश के कई शहरों में कई आतंकवादी पकड़े गये.
उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत रूप से डीआइजी, प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम व एसएसपी को आवेदन दिया कि उन्हें सुरक्षा, आर्थिक मदद व मानसिक परेशानी से निजात दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाये जायें. पर अब तक उनके आवेदन पर विचार नहीं किया गया. इतना ही नहीं सिविल लाइंस थानाध्यक्ष को आवेदन देने पर कहा गया कि तौसीफ को पकड़ने वाली बात आवेदन से हटा दो, उसके बाद आवेदन लेंगे.
अनुराग ने बताया कि हालात यह है कि राजेंद्र आश्रम से मकान मालिक ने साइबर कैफे वाली दुकान खाली करा दी. उनका पैतृक घर टिकारी के सलेमपुर गांव में है.
3500 रुपये व प्रशस्तिपत्र से करना पड़ा संतोष
अनुराग ने बताया कि 24 फरवरी 2018 को बीएमपी- पांच फुलवारी शरीफ पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व पुलिस महानिदेशक बिहार के हाथों प्रशस्ति -पत्र के साथ 3500 रुपये देकर पुरस्कृत किया गया. उन्होंने बताया कि अब रोजगार बंद होने के बाद उनके परिवार की हालत दयनीय हो गयी है. वह परिवार के साथ असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
उनके सामने समस्या आ गयी है कि रोजगार तलाशने के लिए दूसरे शहर में जाने की बात सोचते हैं. पर सुरक्षा के ख्याल से कहीं जाने से भी डर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के अधिकारी ने केस डायरी में उनके द्वारा पकड़ने की चर्चा तक नहीं की है. सरकारी अफसर की इस कार्रवाई से उन्हें दुख हुआ है.
यह है पूरा मामला
13 सितंबर 2017 को आतंकी पठान तौसीफ अपने साथी सना खान के साथ राजेंद्र आश्रम स्थित साइबर कैफे में इंटरनेट पर काम करने पहुंचा था. शक होने पर साइबर कैफे चलानेवाले अनुराग बसु ने इसकी सूचना सिविल लाइंस थाने व वरीय पुलिस अधिकारी को दी. समय पर पुलिस के नहीं पहुंचने पर आतंकी अपने साथी के साथ भागने लगा और भागने के क्रम में अनुराग बसु ने दोनों को पकड़ लिया. बाद में साइबर कैफे के हार्ड-डिस्क से कई तरह के सबूत जांच एजेंसियों के अधिकारी को मिले और देश के कई शहरों से आतंकियों को पकड़ने में सफलता मिली.
