गया : आवारा पशुओं के खिलाफ कार्रवाई करने में निगम पूरी तौर से विफल साबित हो रहा है. कुछ दिन पहले तक निगम के अधिकारी कहते थे कि आवारा पशुओं को पकड़ने वाली मशीन आने के बाद यह काम आसानी से किया जा सकेगा. लेकिन, लाखों रुपये खर्च कर मशीन आये तीन माह से अधिक बीत गये. इसके बाद भी शहर में जगह-जगह सड़क के बीच या फिर किनारे आवारा पशुओं का जमघट देखा जा सकता है.
इतना ही नहीं गया=बोधगया मुख्य मार्ग पर, टिल्हा धर्मशाला के पास, रामसागर तालाब के दोनों ओर सड़क के किनारे खटाल खोल लिये गये हैं. पहले कई जगहों पर गाय आदि सड़क किनारे बांधने की शिकायत मिलती थी. लेकिन, अब यहां खटाल खोल कर दूध का कारोबार किया जा रहा है. इस रोड से हर रोज नगर निगम व जिला प्रशासन के अधिकारियों का गुजरना होता है.
इसके बाद भी लोग बेखौफ होकर अपना धंधा चला रहे हैं. इतना ही नहीं गोबर आदि कचरे को नालियों में बहा देते हैं. आवारा पशुओं व खटाल पर कार्रवाई करने की बात पर निगम प्रशासन पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराये जाने की बात कह कर टालमटोल कर रहा है.
कई बार बनायी कार्रवाई की योजना : शहर में सड़क किनारे चलाये जा रहे अवैध खटाल पर कार्रवाई करने को लेकर निगम में कई बार योजना बनायी गयी है. लेकिन इसपर आज तक अमल नहीं हो सका है. बोर्ड व स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों में अब तक सिर्फ कार्रवाई की योजना ही तैयारी की जा सकी है.
आवारा पशुओं के मामले में प्राइवेट तौर पर पकड़ने की जिम्मेदारी देने की बात की गयी थी. इसके लिए निगम से विज्ञापन भी निकाला गया. लेकिन, किसी ने इसमें रुचि नहीं दिखायी. पितृपक्ष मेला में खुद ही निगम के कर्मचारी को आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए गाड़ी के साथ निकाला गया. कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और कुछ जगहों पर कर्मचारियों से मारपीट भी की.
खुद ही कर रहे शहर को गंदा : शहर को सुंदर व साफ रखने के लिए निगम के साथ-साथ आम लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है. लेकिन, अगर खुद ही लोग शहर को गंदा करने पर उतारू हों, तो इसका कोई हल नहीं निकाला जा सकता है. आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए निगम से अभियान चलाने की बात की जाती है. दूसरी ओर खुद ही लोगों ने सड़क किनारे अतिक्रमण कर खटाल खोल लिया है. इसके साथ ही गंदगी भी सड़क किनारे ही फैला देते हैं. कई बार निगम से इन खटाल चलाने वालों को नोटिस भी दिया गया है.
